चंडीगढ़। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को कर्ज पर अतिरिक्त ब्याज दर वसूलना महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता आयोग ने बैंक को सेवा में कोताही का दोषी करार दिया है। आयोग ने हर्जाने के रूप में 3.67 लाख रुपये शिकायतकर्ता को देने के निर्देश दिए हैं। वहीं, मानसिक उत्पीड़न के लिए 15 हजार रुपये भी देने पड़ेंगे।किशनगढ़ निवासी गौरव शर्मा ने आयोग को दी शिकायत में बताया कि वह भारत सरकार की एमएसएमई मंत्रालय की ओर से चलाए जा रहे एमएसएमई प्रोग्राम के तहत उद्यम का काम करता है। व्यवसाय चलाने के लिए उन्होंने फरवरी 2021 में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से कर्ज लिया। बैंक ने कम ब्याज दर पर ऋण देने का आश्वासन दिया था। शिकायतकर्ता ने एक खाते में 96.30 लाख व दूसरे खाते में 52.50 लाख का कर्ज प्राप्त किया। कर्ज लेने के बाद उसे पता चला कि अन्य बैंकों के मुकाबले आईडीएफसी फर्स्ट बैंक कर्ज पर उससे अधिक ब्याज वसूल रहा। बैंक को इसकी शिकायत दी गई, लेकिन कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने खाते बंद करने का अनुरोध किया। इस पर बैंक ने चार प्रतिशत फौजदारी शुल्क मांगना शुरू कर दिया। एमएसएमई फर्म के तहत ऐसा कोई फौजदारी शुल्क स्वीकार्य नहीं था।