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टेक्सटाइल उद्यमियों में विरोध शुरू

Mon, 18 Aug 2014 12:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पानीपत
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पानीपत। हैंडलूम व्यापारियों के शांत होने के बाद वुलन और शौडी मिल उद्यमी सरकार के सामने आने को तैयार हो गए हैं।
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वुलन और शौडी मिल मालिक सरकार की ओर से बढ़ाई न्यूनतम मजदूरी को बढ़ाने से आक्रोशित हैं और सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की रहे हैं। एसोसिएशन ने इसको लेकर मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा है।

ऑल इंडिया वुलन एंड शौडी मिल एसोसिएशन के सचिव सुरेश गुप्ता ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस फैसले को केवल मात्र दिखावा बताया है। उन्होंने पत्र में कहा कि यह मजदूरों को खुश करने का एक तरीका है। इससे महंगाई कम होने के बजाय बढ़ेगी।
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सरकार को इस पर दोबारा विचार करना चाहिए। सरकार की ओर से प्रस्तावित न्यूनतम वेतन वृद्धि से पहले से संकट से गुजर रहे टेक्सटाइल उद्योग को बड़ा झटका लगेगा। इससे उद्योग बंद होने के कगार पर आ जाएगा या उद्यमियों को अपने उद्योग धंधों को बंद ही करना पड़ेगा। एसोसिएशन ने ऐसा न करने पर संघर्ष का रास्ता अपनाने की चेतावनी दी है।

इन मांगों को भेजा
प्रदेश में दूसरे पड़ोसी राज्यों से पहले ही न्यूनतम वेतन अधिक है, ऐसे में फिर से वेतन बढ़ाना तर्क संगत नहीं है।
महंगाई की दर पांच प्रतिशत है। फिर से वेतन में एक साथ इतनी वृद्धि उचित नहीं है।
सरकार पहले से हर साल पांच प्रतिशत वेतन वृद्धि करने की कह रही है। ऐसे में करीब 35 प्रतिशत वेतन की वृद्धि करना ठीक नहीं है। इससे टेक्सटाइल उद्योग पर विपरीत असर पड़ेगा।
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सरकार द्वारा यह फैसला लेने से पहले औद्योगिक प्रतिनिधियों व अन्य प्रतिनिधियों के साथ कोई विचार विमर्श नहीं किया गया है, जबकि पहले ऐसे फैसले लेते समय कमेटी बनाकर बारीकियों को परखा जाता था।
वेतन वृद्धि के बाद हर तैयार माल की लागत बढ़ेगी।
टेक्सटाइल के क्षेत्र में एक साथ इतनी वेतनवृद्धि करने से महंगाई बढ़ेगी।
टेक्सटाइल उद्योग पहले ही चीन के उत्पादों के चलते कठिन दौर से गुजर रहा है। इसके बाद वेतन वृद्धि से यह उद्योग निश्चित रूप से बर्बाद हो जाएगा।
उद्यमियों को पड़ोसी राज्यों में मजदूरी कम होने पर वहां पर पलायन करने को मजबूर होना पड़ेगा।  

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