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टीचिंग लोड को लेकर शिक्षकों ने उठाया मुद्दा

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pu222.jpg
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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय में शिक्षकों के पढ़ाने के घंटों को लेकर फिर विवाद उत्पन्न हो गया है। शिक्षकों का आरोप है कि कुछ को अधिक तो कुछ को कम काम दिया जा रहा है जबकि यूजीसी से मानक तय हैं। पीयू प्रशासन तक यह मुद्दा पहुंचा तो अब इसकी जांच की तैयारी चल रही है। टाइम टेबल पास करते समय इन बातों का अधिकारी ध्यान रखेंगे।
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यूजीसी की ओर से तय है कि एक असिस्टेंट प्रोफेसर सप्ताह में 16 घंटे, एसोसिएट 14 घंटे और प्रोफेसर 12 घंटे क्लास लगाएंगे। इसमें भी थ्योरी और प्रैक्टिकल का समय अलग-अलग है। कुछ शिक्षकों ने बताया कि थ्योरी पढ़ाने के बजाय कुछ शिक्षक लैब में जाते हैं और प्रैक्टिकल के बहाने तीन से चार घंटे स्टडी के रूप में जोड़ रहे हैं जबकि नियमों में ऐसा नहीं है। इसके अलावा असिस्टेंट प्रोफेसर ऐसे हैं जो 20 घंटे भी कक्षाएं लेते हैं, उन्हें छूट नहीं दी जा रही है। इस बार यह मुद्दा फिर कई शिक्षकों ने उठाया है। उन्होंने कहा है कि टीचिंग लोड वाले टाइम टेबल को जांच के बाद ही पास किया जाए।
इसके अलावा छात्रों के फीडबैक में पूछे जाने वाले सवालों पर भी उन्होंने अपनी राय दी है। उन्होंने कहा है कि हर शिक्षक की कक्षा से यह फीडबैक लिया जाए न कि सिर्फ एक या दो कक्षाओं से।
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