सात साल पुराने शिक्षक भर्ती घोटाले में लापता केस प्रॉपर्टी का कुछ पता
नहीं चल पाया है। मंगलवार को मामले में क्राइम ब्रांच के तत्कालीन
इंस्पेक्टर चरणजीत सिंह ने सीजेएम अदालत में बयान दर्ज कराए। इंस्पेक्टर
अपने बयान में यह नहीं बता सके कि आखिरकार केस प्रॉपर्टी गई कहां।
उन्होंने
कोर्ट को बताया कि केस प्रॉपर्टी उन्होंने तत्कालीन सब इंस्पेक्टर हरिदत्त
को मालखाने में जमा करवाने के लिए दी थी। इंस्पेक्टर के बयान के आधार पर
सीजेएम ने तत्कालीन एसआई को अगली सुनवाई 16 मार्च के लिए कोर्ट में पेश
होने के लिए नोटिस जारी किया है।
वहीं, इससे पहले बचाव पक्ष ने एसएसपी
की ओर से अदालत में कोई जवाब नहीं आने और केस प्रॉपर्टी के बारे में कुछ
जानकारी न होने का हवाला देते हुए गवाही समाप्त कराने की भी अपील की। वहीं,
हरिदत्त के बयान के बाद बचाव पक्ष इंस्पेक्टर का क्रास करेगा।
यूटी पुलिस
की क्राइम ब्रांच से दिल्ली सीबीआई को ट्रांसफर हो चुके इस मामले की यह केस
प्रॉपटी में 3 लाख 20 हजार का एक चेक और पांच हजार रुपये की नगदी शामिल
थी। यह वह रकम थी जो उम्मीदवारों से बतौर टीचर भर्ती के लिए कथित तौर पर
लिए जाने का आरोप है।
यह है मामला
यूटी शिक्षा विभाग की ओर से
2009 में शहर के सरकारी स्कूलों में कुल 536 टीचरों की भर्ती करवाई जानी
थी। इसमें खरड़ निवासी कमलप्रीत कौर ने भी टीचर पद के लिए आवेदन किया था।
सितंबर 2009 में यूटी पुलिस को दी शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया था कि
जौली और हरदेव ने उसे नौकरी लगवाने का आश्वासन दिया था। इसकी एवज में
उन्होंने उससे 4.5 लाख रुपये मांगे थे।
उनकी शिकायत पर यूटी पुलिस की
क्राइम ब्रांच ने सितंबर 2009 में भर्ती घोटाले का खुलासा किया था। पुलिस
ने दोनों को ट्रैप लगाकर गिरफ्तार किया था। मामला चर्चा में तब आया जब
इसमें तत्कालीन डीपीआई समवर्तक सिंह का नाम सामने आया। हालांकि, डीपीआई को
पुलिस और बाद में सीबीआई ने क्लीन चिट दे दी थी। हाईकोर्ट के आदेश पर मामले
की जांच यूटी पुलिस से सीबीआई को ट्रांसफर कर दी गई थी।