ताऊ देवी लाल की 103वीं जयंती पर न तो प्रदेश के पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला पहुंच सके और न ही बादल। अस्पताल में दाखिल ओमप्रकाश चौटाला ने अपने संदेश के लिए कार्यकर्ताओं के लिए चिट्ठी भेजी तो बादल रैली के दौरान तीन बार आसमान में जरूर छाए, लेकिन मंच पर आए नहीं।
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हालांकि, इनेलो नेताओं को पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के आने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन न तो बादल खुद आए और न ही उनके बेटे उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल। ऐसा पहली बार हुआ है कि ताऊ देवीलाल की जयंती पर हुई रैली में बादल परिवार की हाजिरी न हो।
बता दें कि इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला व उनके बेटे डॉ. अजय सिंह चौटाला जेबीटी भर्ती घोटाले में तिहाड़ जेल में हैं और फिलहाल स्वास्थ्य खराब होने के चलते अस्पताल में दाखिल हैं। हालांकि, चौटाला पिछले साल भी रैली में शामिल नहीं हो पाए थे।
वहीं, प्रकाश सिंह बादल परिवार के साथ चौटाला परिवार का पहले से गहरा नाता है। दोनों ही परिवार एक दूसरे के साथ खड़े हुए मिलते हैं।
पिछले विधानसभा चुनाव में बादल परिवार द्वारा इनेलो के लिए प्रचार करने को लेकर भाजपा व अकाली दल में मनमुटाव हो गया था। क्योंकि भाजपा के साथ पंजाब में अकाली दल की सरकार है। इसी पर हरियाणा भाजपा ने भी बादल के आने पर ऐतराज जताया था।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए और पंजाब में भाजपा के गठबंधन को देखते हुए बादल परिवार रैली में नहीं आया। वहीं, इनेलो प्रमुख के जेल के अंदर होने के कारण पिछले दो साल से इनेलो और अकाली दल की दोस्ती पर असर पड़ता भी दिख रहा है। इसी का असर रहा कि बादल परिवार से ताऊ की जयंती पर कोई भी सदस्य श्रद्धांजलि देने नहीं आया। इसको लेकर कार्यकर्ताओं में भी चर्चा रही। हालांकि, इनेलो नेताओं का कहना है कि पंजाब में चुनाव होने के कारण बादल परिवार के सदस्य नहीं आ पाए।
रैली से पहले चर्चा थी कि रैली में उत्तर प्रदेश की पूर्व सीएम व बसपा सुप्रीमो मायावती आएंगी, लेकिन मंच पर ऐसा कोई नेता नहीं आया जो बसपा से संबंधित हो। पिछले दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि इनेलो बसपा के साथ जाएगा और गठबंधन करेगा।
इनेलो की ओर से मुख्य फ्लैक्स बोर्ड पर ताऊ देवीलाल के साथ बाबा साहेब अंबेडकर की तस्वीर लगाई गई।
इतना ही नहीं मंच पर ताऊ देवीलाल की प्रतिमा के साथ बाबा साहेब की प्रतिमा भी लगाई गई। हालांकि, इनेलो ने इसे सद्भावना का नाम दिया है। इनेलो का कहना है कि ताऊ और बाबा ने समाज को जोड़ने के लिए हर वर्ग के लिए काम किया है, इसलिए वे बाबा साहेब का सम्मान कर रहे हैं। हालांकि, फरवरी में हुए जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुए दंगों के बाद से इनेलो ने हर विधानसभा क्षेत्र में सद्भावना सम्मेलन किए हैं। उधर, राजनीतिक लोग मानते हैं कि यह दलित वोटों को भुनाने के लिए कोशिश है।
पूरी रैली में इनेलो का फोकस किसान, पिछड़ा वर्ग व दलित वोटों पर रहा। हर मुख्य वक्ता ने किसान और पिछड़ा व दबे कुचले वर्ग की बात कही।
अभय चौटाला ने किसानों के लिए आंदोलन तक करने बात कही। वहीं, ओमप्रकाश चौटाला की चिट्ठी में भी किसानों और कमेरे वर्ग पर खास जोर दिया गया है। ओमप्रकाश चौटाला ने अपने संदेश में कहा है कि इनेलो शुरू से किसानों व पिछड़े लोगों के साथ रहा है, आगे भी यह परंपरा जारी रहेगी।
चौटाला ने अपने संदेश में कहा है कि कार्यकर्ता उसकी ताकत हैं। अभय चौटाला द्वारा पढ़े गए इनेलो प्रमुख के संदेश में कहा गया है कि भाजपा सरकार ने किसानों की जेब काटी है। वे गांव-गांव आएंगे और जब तक किसानों से लूटे गए करीब 300 करोड़ रुपये का हिसाब नहीं कर देते, वे चैन से नहीं बैठेंगे।