चंडीगढ़। शहर की इमली रोड बदहाल है। चंडीगढ़ बसने के साथ सड़क का नाम इमली रोड रखा था। अब यहां सड़क किनारे लगे पेड़ अंतिम सांसें गिन रहे हैं। कुछ गिने-चुने पेड़ ही बचे हैं। देखरेख के अभाव में वह रोग लगने के साथ खोखले हो चुके हैं।
साल 1964-65 में गर्वनर हाउस से सेक्टर-45 और 46 के चौक तक रोड के दोनों ओर इमली के पौधे लगाए गए थे। सभी पेड़ इमली के होने के कारण तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों ने रोड का नामकरण इमली रोड रखा था। इन पेड़ों का ख्याल उद्यान विभाग रखता था, लेकिन समय बीतने के साथ देखभाल भी कम हो गई और अब बदहाली की हालत में पहुंच गई है। पेड़ों को दीमक ने खोखला कर दिया है।
कोहरे से होता है अधिक नुकसान
इमली के पेड़ों को सबसे ज्यादा सर्दी के सीजन में पड़ने वाले कोहरे से नुकसान होता है। यदि उद्यान विभागन सर्दी के दौरान पेड़ों पर पानी की फुहार डालें और पेड़ों की जिंक के साथ सिंचाई की जाए तो यह पेड़ रोगमुक्त रहेंगे।
-कमलतारा, पूर्व एसडीओ, उद्यान विभाग
नहीं हो रहा नोटिफिकेशन का पालन
यूटी का उद्यान विभाग नोटिफिकेशन का पालन नहीं कर रहा है। इसके अनुसार जिस प्रजाति का पेड़ गिरता या सूख जाता है, उस स्थान पर उसी प्रजाति के पौधे लगाए जाने चाहिए, लेकिन उद्यान विभाग वह पौधे लगा रहा है, जिनकी देखभाल कम करनी पड़ती है और जल्दी ही वह बड़े हो जाते हैं।
इमली रोड को बचाएगी ग्रीन ब्रिगेड
इमली रोड को बचाने के लिए आर्गेनिक शेयरिंग ने ग्रीन ब्रिगेड के नाम से मुहिम शुरू की है। इसमें थियेटर कलाकार, पर्यावरणविद, समाजसेवियों को शामिल किया है। आर्गेनिक शेयरिंग के संचालक राहुल महाजन ने बताया कि मुहिम की शुरुआत हो गई है। अमर उजाला के चलो हरियाली फैलाएं अभियान में रोड पर इमली के पौधे लगाकर रोगग्रस्त पेड़ों का इलाज भी किया जाएगा।
नहीं पता कहां है इमली रोड
चंडीगढ़ के लोगों को पता ही नहीं कि इमली रोड कहां पर है। शीतल, रजनी बजाज, राजकुमार ने बताया कि उन्हें पता ही नहीं है कि शहर में इमली रोड भी है। वैसे उद्यान विभाग को रोड को बचाने के लिए आगे आना चाहिए।
क्या बोले अधिकारी?
ऐसा नहीं है कि इमली के पेड़ों को बचाने के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। समय के साथ पेड़ कमजोर हो चुके हैैं और अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। जिस कारण पेड़ रोग लगने के साथ सूख रहे हैं। जल्द ही उनके स्थान पर इमली के पौधे लगाए जाएंगे।
-केपी सिंह, एसई, उद्यान विभाग, चंडीगढ़