‘चुकाएंगे नहीं’ नाटक में लगे हंसी के ठहाके
- फोटो : अमर उजाला
डिपार्टमेंट ऑफ कल्चरल अफेयर्स, चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन एवं टैगोर थिएटर सोसाइटी की ओर से ट्राइसिटी थिएटर फेस्टिवल का आयोजन हुआ। यह प्रोग्राम सेक्टर-18 स्थित टैगोर थिएटर में 27 से 29 दिसंबर तक किया जा रहा है। फेस्टिवल के दूसरे दिन बुधवार को हिंदी कॉमेडी ‘चुकाएंगे नहीं’ नाटक का मंचन सात्विक आर्ट सोसाइटी के कलाकारों ने किया। नाटक के निर्देशक अमित सनोरिया और सरवर अली ने किया। यह नाटक राजनीतिक कटाक्ष रहा, जिसमें आम जनता के जीवन पर महंगाई के कारण पड़ने वाली मार और आम आदमी की ओर से किए विरोध को दिखाया।
कहानी एक ऐसे समाज की है, जिसमें जीवन की मूलभूत वस्तुएं जिनमें फल, सब्जियां, दालें आसमान को छू रही हैं। जिसकी वजह से मध्यवर्गीय लोगों पर लगातार बोझ बढ़ रहा है। जिसे सहन उनके लिए मुश्किल होता जा रहा हैं। नाटक में हास्य की स्थिति तब आती है, जब लक्ष्मी वस्तुएं पहुंच से बाहर होने पर एक मॉल से खाने की काफी चीजें चुराकर लाती है और अपने पति गोबिंद से यह बात का छुपाती है। वहीं गोबिंद काफी वसूलों वाला इंसान होता है जो भूख सहन कर लेगा लेकिन चोरी किए गए खाने को छुएगा नहीं। इस दौरान लक्ष्मी और उसकी सहेली माला चोरी का सामान देख रही होती हैं तो अचानक गोबिंद घर आ जाता है।
इस बात का पता चलते ही लक्ष्मी कुछ सामान को घर के कोने में और कुछ सहेली माला के पहने हुए कोट में छुपा देती है। इस वजह से माला का पेट फूल कर बाहर दिखाई देने लगता है। गोबिंद जब उसे देखता है तो दंग रह जाता है। लक्ष्मी पकड़े जाने के डर से माला को प्रेगनेंट बता देती है। इसके बाद इस झूठी कहानी को छिपाने के लिए माला को कई झूठ बोलने पड़ते हैं और इन्हीं में से कई हास्य कहानियां जन्म लेती हैं। अंत में गोबिंद को माला के पति जोगी से असली बात का पता चल जाता है। यहीं नाटक खत्म हो जाता है।
इन कलाकाराें ने किया मंचन
गोबिंद-सरवर अली
जोगी- दुर्गेश अतवाल
जक्ष्मी- ज्योति बंसल
माला- खूशबू
पापा- डॉ. राजन गुप्ता
पुलिस अफसर- अभिनव कांत
सीबीआई इंस्पेक्टर- साहिल
हवलदार- अरुण ठाकुर