पंजाब और हरियाणा के बीच बनी सियासत की नहर का पानी हरियाणा के किसानों को कब मिलेगा, इसे लेकर हरियाणा सरकार चिंतित है। उधर, पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले नहर के मसले पर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का मास्टर स्ट्रोक विपक्ष के लिए मुसीबत बन गया है।
पानी के मुद्दे पर सरकार के प्रस्ताव केजवाब में कांग्रेस ने एसवाईएल की जमीन किसानों को लौटाने का प्रस्ताव दिया था। वह तो खारिज हो गया, पर अकालियों ने यह मुद्दा हाईजैक कर लिया है।
एसवाईएल के जिस मुद्दे का जिक्र आते ही पंजाब में पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह का नाम आता था, उस मुद्दे पर अब अकाली प्रभावी नजर आ रहे हैं। शिअद ने साल 2017 के विधानसभा चुनाव का यह अहम मुद्दा पहले ही अपने पाले में कर लिया है।
दिलचस्प बात है कि पंजाब कांग्रेस अपने हाथ से यह मुद्दा खिसकता देख एक दम से सक्रिय हो गई है। कपूरी में जिस स्थान से पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने फावड़ा चलाकर एसवाईएल के निर्माण की शुरुआत करवाई थी, कांग्रेसियों ने वहीं जाकर नहर पर मिट्टी डाली, ताकि वे इस मुद्दे पर खुद को सरकार से एक कदम आगे साबित कर सकें।
क्रेडिट लेने की होड़ में केजरी भी पीछे नहीं
दूसरी ओर मामले पर क्रेडिट लेने की इस होड़ में दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल भी पीछे नहीं हैं। उन्होंने मामले में पंजाब केपक्ष में स्टैंड लिया है। वह दिल्ली के सीएम हैं और समझौते के तहत दिल्ली को भी पानी जाता है, पर पंजाब में दिल्ली का इतिहास दोहराने के सपने देख रहे केजरीवाल ने पंजाब का पक्ष लेकर सियासी चाल चली है। केजरीवाल को यह आभास है कि पानी का मुद्दा बेहद अहम है, क्योंकि यह किसी को भी सत्ता के गलियारे तक पहुंचा सकता है तो किसी को कुर्सी से उतार भी सकता है।
हरियाणा भाजपा ने दी दिल्ली का पानी बंद करने की धमकी
इस बीच केजरी के बयान के चलते हरियाणा में सियासी पारा चढ़ चुका है। गुस्साई भाजपा ने दिल्ली का पानी बंद करने की धमकी दे डाली है। हरियाणा-पंजाब के बीच बनी इस सियासी नहर का पानी तो आम जनता तक आज तक नहीं पहुंचा, लेकिन हरियाणा सरकार के लिए यह मुद्दा मुसीबत का सबब बन चुका है।
जाट आरक्षण के बाद एसवाईएल का मुद्दा दूसरी चुनौती :
पहले से ही जाट आरक्षण की आग में जल रहे हरियाणा को संभालने में लगी भाजपा सरकार के सामने अब एसवाईएल का पानी दूसरी चुनौती बन गया है। हरियाणा जनहित कांग्रेस (बीएल) के अध्यक्ष कुलदीप बिश्नोई ने यहां तक कह दिया है कि वोट बैंक की राजनीति के लिए भाजपा हरियाणा के हितों की बलि चढ़ाने पर उतारू है।
एसवाईएल मामले पर भाजपा जानबूझकर पंजाब सरकार को छूट दे रही है। भाजपा को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। पंजाब सरकार ने जब एसवाईएल की जमीन छोड़ने का बिल विधानसभा में पास किया तो उसी दिन भाजपा को अदालत में स्टे के लिए जाना चाहिए था। सवाल उठाया है कि क्या भाजपा पंजाब में नहर तोड़े जाने का इंतजार कर रही थी।
केजरी का नाम नहीं लेना चाहते विज :
हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल एक ऐसे स्वार्थी व्यक्ति हैं, जिन्होंने हरियाणा की धरती पर जन्म लिया और अब हरियाणा के हितों के खिलाफ बात कर रहे हैं। ऐसे व्यक्ति की तो विधानसभा में चर्चा भी नहीं की जानी चाहिए।