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SYL के लिए कांग्रेस और अकालियों के बीच छिड़ा क्रेडिट-वार

Sat, 12 Mar 2016 11:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब के राजनेता - फोटो : अमर उजाला
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एसवाईएल की जमीन डी-एक्वायर करने के मुद्दे पर कांग्रेस और अकालियों में क्रेडिट-वार छिड़ गई। शून्य काल के दौरान सत्ताधारियों और विपक्षियों के बीच इस मुद्दे को लेकर काफी नोक-झोंक हुई। आखिर कांग्रेस ने वाकआउट कर दिया। सीएलपी लीडर चरनजीत सिंह चन्नी ने कहा कि वीरवार को विधानसभा केइतिहास में काला दिन था। विपक्ष को बोलने नहीं दिया, बाहर निकाल दिया। हम संशोधन लाए थे कि किसानों को जमीन वापस की जाए। इतने में अकालियों ने खड़े होकर विरोध शुरू कर दिया।
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चन्नी ने कहा कि विपक्ष को सिर्फ इसलिए बाहर निकाला गया ताकि बहस में शामिल न हो सकें। अकालियों केपास यह आइडिया नहीं था। हमारे संशोधन में जमीन किसानों को देने का प्रस्ताव था। अगर इन्हें लाना होता तो नौ साल में कभी भी ले आते। चलो, हमारी मांग मान ली, धन्यवाद, इस मुद्दे पर बिल लाएं और किसानों को बचाएं। बिक्रम मजीठिया ने कहा कि बायकॉट कर कांग्रेस पंजाबियों को मुंह दिखाने के लायक नहीं रही। अपने मुद्दे रखते, बहस करते। सारे पंजाबियों ने आलोचना की तो अब कह रहे हैं।

अजीत इंदर सिंह मोफर ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी का मुद्दा उठाया। स्पीकर चरनजीत सिंह अटवाल ने कहा कि दो आयोग बैठ चुके हैं। डिप्टी सीएम सुखबीर बादल ने कहा कि सीबीआई जांच चल रही है। इसकेबाद कांग्रेसियों और अकालियों ने खड़े होकर एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। विरसा सिंह वल्टोहा ने कहा कि राजनीति केलिए यह मुद्दा उठाया जा रहा है, लेकिन सिख 1984 को कभी नहीं भूल सकते। इसके बाद कांग्रेस ने वाकआउट कर दिया।
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शिक्षामंत्री डॉ. दलजीत चीमा ने कहा कि मोफर ने एक चैनल पर कहा कि हरियाणा का राइपेरियन हक बनता है। 1955 में राजस्थान को पानी देने को भी इन्होंने जायज ठहराया। तभी बलविंदर बैंस ने अकालियों पर बरसते हुए कहा कि अपने गुनाहों पर पर्दा मत डालो। वल्टोहा ने इसका विरोध किया। फिर अकालियों और बैंस ब्रदर्स के बीच तीखी नोक-झोंक हुई।
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