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एसवाईएल पर त्रिकोणीय सियासत, शिअद, कांग्रेस और आप में छिड़ी रार

Thu, 17 Mar 2016 10:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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बादल ने केजरीवाल और मनोहर लाल खट्टर - फोटो : amar ujala
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सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर को लेकर चल रहे विवाद पर सियासत अब त्रिकोणीय हो गई है। इस मुद्दे पर सियासत में अब दिल्ली सरकार भी कूद पड़ी है। माना जा रहा है कि अब तक पंजाब और हरियाणा में गहराए विवाद के बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बयान ने आग में घी का काम किया है।
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दिल्ली के मुख्यमंत्री के बयान को हरियाणा के तमाम नेताओं ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। साथ ही उन्होंने केजरीवाल पर निशाना साधा है। इनेलो नेता अभय चौटाला ने दिल्ली को पानी की आपूर्ति बंद कर हकीकत का अहसास कराने की बात कही है, तो प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने भी केजरीवाल पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया है कि यदि हरियाणा का पानी नहीं मिलेगा तो दिल्ली का क्या होगा। प्रदेश के कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने भी दिल्ली के सीएम के बयान को एसवाईएल कांसेप्ट के खिलाफ बताते हुए कहा है कि शायद उन्हें इस बारे में पूरी जानकारी नहीं है।

हरियाणा से दिल्ली को रोजाना करीब करीब 1100 क्यूसेक पानी की आपूर्ति की जाती है। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान जब उपद्रवियों ने सीएलसी चैनल को क्षतिग्रस्त कर दिया था तो दिल्लीवासियों को पानी की किल्लत से जूझना पड़ा। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीएलसी को दुरस्त किया गया, ताकि दिल्ली में पानी की किल्लत दूर हो सके। इनेलो के वरिष्ठ नेता अभय चौटाला ने हरियाणा को पानी न देने संबंधी केजरीवाल के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि अगर हरियाणा सरकार दिल्ली को पानी की आपूर्ति बंद कर दे तो केजरीवाल को हकीकत का अहसास हो जाएगा।
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उन्होंने भाजपा सरकार पर इस मामले को गंभीरता से न लेने का आरोप लगाया है। चौटाला ने कहा है कि अब तक लोकसभा या राज्यसभा में भाजपा के किसी सांसद ने इस मसले पर अपना पक्ष नहीं रखा है। इससे अंदाज लगाया जा सकता है कि भाजपा सरकार इस मसले को लेकर गंभीर नहीं है।

जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट जाएगी हरियाणा सरकार
हरियाणा के कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने एसवाईएल मामले में पंजाब सरकार के बाद दिल्ली सरकार के रवैये पर अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि वे हाल ही में पंजाब विधानसभा में पेश एसवाईएल संबंधी बिल सहित 2004 के प्रस्ताव को भी रद्द करने की मांग करेंगे। ये दोनों की प्रस्ताव असंवैधानिक हैं। जरूरत पड़ी तो हरियाणा सरकार मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने से भी गुरेज नहीं करेगी। धनखड़ ने कहा कि केजरीवाल अंतरराज्यीय जल समझौते के खिलाफ बातें कर रहे हैं। वे राजनीतिक लाभ के चक्कर में ऐसे बयान दे रहे हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली के लोगों के पानी की चिंता नहीं है, इसलिए वे एसवाईएल के मुद्दे पर पंजाब का साथ दे रहे हैं। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि दिल्ली को भाखड़ा मेन लाइन, पश्चिमी-यमुना नहर तथा दिल्ली चैनल से दिल्ली को 1100 क्यूसेक से अधिक पानी की रोजाना आपूर्ति की जाती है, जो हरियाणा से होकर गुजरती है। साल 1979 में भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड की बैठक में दिल्ली के लिए 71 क्यूसेक पानी निर्धारित किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 125 क्यूसेक किया गया।

अपने दायित्व से भाग रहा पंजाब:  धनखड़
धनखड़ ने कहा कि रेलवे और नहरों की सुरक्षा की जिम्मेदार राज्यों का केंद्रीय दायित्व है। सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर पर पंजाब के जिस हिस्से में नहर बनने की निशानदेही निर्धारित है, उसे समतल करना कानून के खिलाफ है। पंजाब ऐसा कर अपने दायित्व से भाग रहा है।

कांग्रेस के रुख पर भड़के कृषि मंत्री
धनखड़ ने कहा कि जब सर्वदलीय बैठक बुलाई गई तब सभी दलों के नेता राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी को ज्ञापन देने के लिए गए थे, लेकिन उस समय कांग्रेस पार्टी के नेता चंडीगढ़ में रहते हुए भी सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं हुए। आज वे इस मुद्दे पर राज्यपाल से मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगता है कांग्रेस पार्टी एक ड्रामा पार्टी बन गई है।
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