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सरोगेसी अस्सिटिव रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी कमेटी का गठन

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चंडीगढ़। सरोगेसी अधिनियम में बदलाव के बाद यूटी प्रशासन ने सरोगेसी आर्ट कमेटी (अस्सिटिव रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी) का गठन कर दिया है। इसमें प्रशासक को चेयरपर्सन व स्वास्थ्य सचिव को वाइस चेयरपर्सन बनाया गया है। सलाहकार, गृहसचिव, सचिव सोशल वेलफेयर, सेक्रेटरी लॉ एंड जस्टिस, स्वास्थ्य निदेशक और संयुक्त निदेशक मेडिकल सुपरिंटेंडेंट जीएमएसएच-16 को सदस्य बनाया गया है। अब इस कमेटी की देखरेख में शहर के सरकारी व निजी डॉक्टर सरोगेसी के तहत प्रक्रिया कर पाएंगे।
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गौरतलब है कि 25 जनवरी 2022 को सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम 2021 लागू कर दिया गया है। इसके बाद से फिर प्रक्रिया बेहद जटिल हो गई है। इसे लेकर सेंटर संचालक असमंजस की स्थिति में हैं। इस एक्ट के लागू होने से किराए की कोख का व्यवसायीकरण बंद कर दिया गया है। इसके अनुसार अब रिश्तेदार ही सरोगेट मां बन सकेगी। यह किस तरह होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं किया गया है। इससे सरोगेसी की प्रक्रिया पूरी तरह बंद है। ऐसे में कमेटी का गठन होने से इस तकनीक से इलाज करने वाले निजी व सरकारी डॉक्टरों ने राहत की सांस ली है। कमेटी गठित होने से सबसे ज्यादा खुश शहर के निजी डॉक्टर हैं क्योंकि 90 प्रतिशत सरोगेसी के मामले शहर के निजी अस्पतालों में किए जाते हैं। इन डॉक्टरों का कहना है कि प्रशासन को इस एक्ट को प्रभावी रूप से लागू करने में इस कमेटी के सदस्य के रूप में निजी अस्पतालों के डॉक्टरों को भी नामित किया जाना चाहिए ताकि वे इसके सभी पहलुओं से अवगत हो सकें।
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