नई दिल्ली/चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री आवास के सामने की सड़क खोलने के पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। यह सड़क हाईकोर्ट के आदेश पर एक मई से प्रायोगिक आधार पर आम आदमी के लिए खोली गई थी। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पंजाब सरकार की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए कहा कि कोई भी नहीं चाहता कि कुछ भी अप्रिय हो। इस मामले में अगली सुनवाई सितंबर में होगी।जस्टिस संजीव खन्ना ने सुनवाई के दौरान कहा कि कभी-कभी लोगों को असुविधा होती है, हमें यह नहीं भूलना चाहिए। पंजाब के महाधिवक्ता गुरमिंदर सिंह ने पीठ से हाईकोर्ट के निर्देश पर रोक लगाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि पंजाब में आतंकवाद फिर से पनप रहा है। एक सीएम आवास रॉकेट ग्रेनेड की पहुंच के दायरे में है। इस पर जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा कि इस दलील से आपको कोई मदद नहीं मिलेगी। उसे तो लंबी दूरी से भी प्रक्षेपित किया जा सकता है। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में दर्ज है कि यह बफर जोन है। जवाब में वकील ने कहा कि मुख्य सड़क सीएम निवास से 30 मीटर की दूरी पर है। सिद्धू मूसेवाला मामले में भी घटना ठीक उसी समय हुई जब सुरक्षा हटाई गई थी।
चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हाईकोर्ट ने सुरक्षा संबंधी खतरे को कल्पना की उपज बताया है। सुरक्षा का प्रबंधन सरकार पर छोड़ दिया जाना चाहिए। जस्टिस खन्ना ने कहा, इस पर टिप्पणियां नहीं की जानी चाहिए थीं लेकिन एक सप्ताह तक यातायात चालू रखने से क्या हो जाएगा। जवाब में मेहता ने कहा कि अगर एक सप्ताह में कोई अप्रिय घटना हो जाती है तो क्या कोई जिम्मेदारी लेगा? जस्टिस दत्ता ने जानना चाहा कि यह सड़क कब से बंद है? क्या कोई दूसरा रास्ता नहीं ढूंढ़ा जा सकता? पंजाब सरकार ने कहा कि वह इस पर काम कर रही है।
आतंकियों को सिर्फ एक बार सफल होना होता है मगर एजेंसियों को बार बार
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह भी कहा कि आतंकियों को केवल एक बार सफल होना होता है लेकिन एजेंसी को हर बार सफल होना होता है। कई आतंकवादी घटनाएं सामने नहीं आतीं क्योंकि उन्हें एजेंसियां टाल देतीं हैं। हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशक या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को एक मई से प्रयोगात्मक आधार पर पंजाब के मुख्यमंत्री के आवास के सामने नयागांव रोड के एक हिस्से को आम आदमी के लिए खोलने का निर्देश दिया था ताकि भीड़ को कम किया जा सके। 1980 के दशक में आतंकवाद के दौर में मुख्यमंत्री आवास के सामने की सड़क बंद कर दी गई थी।
बुधवार शाम आधे घंटे के लिए खुली थी सड़क, फिर कर दिया था बंद
पंजाब सीएम आवास के सामने की सड़क को बुधवा शाम साढ़े 6 बजे महज आधे घंटे के लिए खोला गया था। करीब 25 साल बाद खुली इस सड़क को शाम सात बजते ही बंद कर दिया गया था। बैरिकेड्स को हटाकर सड़क खोलने की कार्रवाई के दौरान स्थानीय थाना प्रभारी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी व कोर्ट के कर्मचारी भी मौजूद रहे। इसकी वीडियोग्राफी भी करवाई गई थी। दावा किया गया था कि सड़क रोजाना सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक खोली जाएगी लेकिन वीरवार और शुक्रवार को ऐसा नहीं हुआ। सड़क पूरे दिन बंद रही।
कहा था-हरियाणा सीएम आवास के सामने की सड़क खुली है तो पंजाब के क्यों नहीं
सेक्टर-2 स्थित पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के रहते समय उनके सरकारी आवास के सामने सड़क को सुरक्षा कारणों के चलते बंद कर दिया गया था। हालांकि इस मामले को लेकर कई बार शिकायतें भी हुईं लेकिन पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इस सड़क को नहीं खोला। मामला हाईकोर्ट तक चला गया। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान आम लोगों के लिए सड़क बंद करने पर पंजाब सरकार व यूटी प्रशासन से जवाब तलब किया गया तो अधिकारियों को जवाब देने नही सूझा क्योंकि हाईकोर्ट का कहना था कि जब हरियाणा के मुख्यमंत्री आवास के बाहर की सड़क आम लोगों के लिए खुली है तो पंजाब के लिए अलग प्रावधान क्यों किया गया है। हाईकोर्ट ने 23 अप्रैल को इस मामले में सुनवाई करते हुए एक मई से इस सड़क को सुबह 7 से शाम 7 बजे तक खोलने के आदेश दिए थे।