फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बादल-कांग्रेस में तकरार, प्रदेश प्रधान ने मांगे 5 सवालों के जवाब

Sun, 22 Nov 2015 10:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
दिल्ली में सुखबीर बादल ने कांग्रेस पर आरोप लगाए तो कांग्रेस ने उन पर और उनकी सरकार पर तीखा जवाबी हमला बोला। पंजाब प्रदेश कांग्रेस प्रधान प्रताप बाजवा ने सुखबीर के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। इसके साथ ही पंजाब के लोगों से अपील की कि वे बादल और मजीठिया परिवार का सियासी और सामाजिक बायकॉट करें।
विज्ञापन


शाम को कांग्रेस भवन में प्रेस कांफ्रेस के दौरान बाजवा ने सुखबीर की ओर से कांग्रेस पर लगाए सभी आरोपों को सिरे से नकारा। उन्होंने कहा कि सुखबीर यह साबित करें कि सरबत खालसा के पीछे कांग्रेस का हाथ था तो वह बड़ी से बड़ी कीमत चुकाने को तैयार हैं।

सरबत खालसा के किसी भी प्रस्ताव को कांग्रेस का समर्थन नहीं था। दो कांग्रेसी रमनजीत सिंह सिक्की और इंदरजीत सिंह जीरा एक सिख के तौर पर उसमें शामिल हुए थे। उन्होंने जवाबी हमला बोलते हुए सुखबीर से सीएम प्रकाश सिंह बादल से संबंधित पांच सवालों के जवाब मांगे।
विज्ञापन

बादल को इन सवालों के जवाब देने को कहा गया

बाजवा ने पूछा कि 1984 में दिल्ली में बादल ने धारा 25-ए की कॉपी फाड़ी और जलाई थी। 1992 में यूएन के सेक्रेटरी जनरल को खालिस्तान के लिए लिखित पत्र दिया था। खुलेआम भारतीय सेनाओं में काम कर रहे सिखों से बगावत करने को कहा था।

ऑपरेशन ब्लू स्टार से पहले एक लाख नौजवानों के हाथों में किताबों के बजाय एके-47 दे दी थी। आतंकी गुरजंट सिंह बुधसिंहवाला को शहीद कहा था।

बाजवा ने सुखबीर से पूछा कि क्या ये राष्ट्रविरोधी नहीं था। कैबिनेट मंत्री सिकंदर सिंह मलूका पर हमले के बारे में बाजवा ने कहा कि सुखबीर गृहमंत्री होते हुए भी अपने मंत्री की पगड़ी नहीं बचा सके।

उन्होंने दोहराया कि इन घटनाओं के पीछे आरएसएस का हाथ है। अब समय आ गया है कि पंजाब को बादल-मजीठिया परिवार से मुक्त किया जाए। क्योंकि ये लोग कुर्सी बचाने के लिए पंजाब को किसी भी हालात में धकेल सकते हैं।

कांग्रेस पर ये आरोप लगाए थे सुखबीर बादल ने

उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने प्रेस कांफ्रेंस कर कांग्रेस पर आतंकियों से साठगांठ का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आतंकियों के हाथों में खेल रहे हैं। सुखबीर का आरोप है कि कांग्रेस पार्टी पंजाब में 80 के दशक जैसा माहौल बनाना चाह रही है।

सुखबीर ने दावा किया है कि सूबे के कुछ कांग्रेसी विधायकों ने 10 नवंबर को एक रैली में भाग लेकर खालिस्तान के समर्थन में प्रस्ताव पास किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंद्रजीत जीरा और रमनजीत सिकी सरीखे विधायकों के साथ कांग्रेस नेता जगदीश सिंह जिंदा भी उस रैली में मौजूद थे। जिसमें खालिस्तान समर्थक झंडे लहराए गए।

उन्होंने कहा है कि वे इसकी शिकायत राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भी करेंगे। बादल का कहना है कि राहुल की अगुवाई में कांग्रेस ने आतंकी संगठनों के साथ महागठबंधन किया है। यह पार्टी आतंकवाद के पुराने दिनों को वापस लाना चाहती है।

सुखबीर ने कहा कि कांग्रेस सूबे का माहौल खराब करना चाहती है। इंदिरा गांधी ने स्वर्ण मंदिर पर हमला किया, राजीव गांधी ने 84 के दंगे कराए और अब राहुल इतिहास दोहराते हुए सूबे में अशांति फैलाना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया है कि खालिस्तान समर्थक रैली में जत्थेदार बनाए गए सभी लोग असल में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले कांग्रेस नेता हैं।
विज्ञापन

आरोपों को नकारते हुए ये पलटवार किया कांग्रेस ने

कांग्रेस पर आतंकियों से साठगांठ के आरोपों के जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शिअद पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा है कि सुखबीर सिंह बादल ने अपनी सरकार की नाकामी को जायज ठहराने की कोशिश की है। वह ध्यान बंटाने के लिए ऐसे आरोप लगा रहे हैं लेकिन पंजाब के लोग जानते हैं कि वह दिल्ली क्यों आए।

अमरिंदर ने कहा कि अगर आज पंजाब में चुनाव हो जाए तो अकाली दल एक भी सीट नहीं जीत पाएगा। सुखबीर सिंह बादल के कांग्रेस पर आतंकी संगठनों से संबंध होने के आरोप को लेकर कैप्टन ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि सरबत खालसा राजनीतिक संगठन नहीं है। उसके कार्यक्रम में कोई भी जा सकता है।

कांग्रेस का एक विधायक जो इससे जुड़ा है, उसने कांग्रेस विधायक के तौर पर इस्तीफा दिया है। दूसरा विधायक निजी हैसियत से इसमें शरीक हुआ। कैप्टन ने सफाई दी कि हम वहां नहीं गए थे, क्योंकि कांग्रेस ने हमेशा से धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा दिया है। जब पंजाब में आतंकवाद चरम पर था, तब भी कांग्रेस ने यही रुख अपनाया था।

उन्होंने मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पर आरोप लगाया कि आतंकवाद के दिनों में प्रकाश सिंह बादल ने ही सबसे पहले संविधान की प्रतियां जलाई थीं और युवाओं को आतंकवाद में झोंका था। उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह बादल से कब से इस्तीफा मांगा जा रहा है। मगर वह इतनी नाकामियों के बाद भी इस्तीफा नहीं दे रहे हैं।

ब्रिटिश नागरिकता के मुद्दे पर उन्होंने राहुल गांधी का बचाव भी किया। कैप्टन ने कहा कि वह 31 सालों से सुब्रह्मण्यम स्वामी को जानते हैं। वह केवल सुर्खियां बटोरना चाहते हैं।

अमरिंदर ने कहा कि पंजाब में कानून व्यवस्था की बेहद खराब हालत है। फरीदकोट में गुरु ग्रंथ साहिब का अपमान किया गया। लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया तो उन पर फायरिंग की गई। तनाव का माहौल बना जिसका फायदा उठाते हुए सरबत खालसा बुलाया गया लेकिन इसमें कोई बेरोजगारी, किसानों की समस्या और गरीबी जैसे अहम मुद्दों पर बात नहीं हुई।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें