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जज्बे को सलामः उम्र 62 साल और बच्चों को देते हैं ऐसी ट्रेनिंग, वो चार साल में जीत लाए 109 मेडल

Wed, 26 Jun 2019 01:23 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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जिम्नास्टिक कोच - फोटो : अमर उजाला
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उम्र 62 साल, 44 डिग्री तापमान हो या सर्दी में 0 डिग्री तापमान। रोजाना 60 किलोमीटर का सफर तय करके तीन तीन घंटे की ट्रेनिंग देना आसान काम नहीं होता। हम बात कर रहे हैं पंजाब स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स (पीआईएस) के गमाडा स्टेडियम सेक्टर-78 के चीफ जिम्नास्टिक कोच समीर देब की। समीर चार साल में खिलाड़ियों को 109 मेडल जितवा चुके हैं।
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उनका कहना है कि हार्ड कोर ट्रेनिंग से ही जिम्नास्टिक चैंपियन बनते हैं। उन्होंने कहा कि छोटी उम्र के जिम्नास्ट को बनाने में कम से कम चार साल लगते हैं, पर इस सेंटर से तो दो साल में ही खिलाड़ियों ने मेडल बटोरने शुरू कर दिए। हाल ही में कोच समीर के ट्रेनी जैकी सागर और अमन (अंडर-14) ने खेलो इंडिया असेसमेंट कैंप में भाग लिया।

कैंप में जैकी को तीसरा स्थान मिला। अब सेंटर में खेल रहे सैकड़ों जिम्नास्टिक्स में वह एकमात्र खिलाड़ी है जिन्हें स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) से 10 हजार रुपये मासिक स्कॉलशिप मिलने लगी है। जैकी गत तीन सालों में कुल 29 पदकों के साथ तीन बार पंजाब स्टेट ओवरऑल बेस्ट जिम्नास्ट बना है।
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इतना ही नहीं इसी सेंटर के अमन ने भी गत तीन वर्षों में 18 मेडल जीतकर स्टेट चैंपियनशिप में दूसरे ओवरऑल बेस्ट जिम्नास्ट का खिताब जीता। इसी कैटेगरी में हर्षदीप सिंह 9 मेडल्स के साथ ओवरऑल तीसरे बेस्ट जिम्नास्ट हैं।
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पीआईएस सेंटर की तमन्ना शर्मा (अंडर-14) ने हाल ही में भारत सरकार की तरफ से पुणे में आयोजित खेलो इंडिया गेम्स में पंजाब राज्य का प्रतिनिधित्व किया और पंजाब से भाग लेने वाली पहली आर्टिस्टिक जिम्नास्ट बनी। वे अब तक राज्य स्तर पर तीन बार ओवरऑल बेस्ट पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर कब्जा जमा चुकी हैं।

तीन साल में कुल 18 मेडल जीत चुकी तमन्ना वर्ष 2019 में एनआईएस पटियाला में आयोजित जूनियर नेशनल कोचिंग कैंप की ट्रेनी भी रही हैं। कोच समीर देब का कहना है कि चैंपियन बनना है तो पढ़ाई, खेल और सेल्फ कांफिडेंस तीनों में महारत होनी चाहिए। उनका कहना है कि मोहाली में पीआईएस के सेंटर खुलने से पंजाब दशकों बाद दोबारा जिम्नास्टिक में नेशनल स्तर पर अपना नाम करने लगा है।

खुद तीन बार रहे हैं चैंपियन
कोच समीर स्वयं तीन बार वर्ष 1979 (नेशनल गेम्स), 1985 (पुलिस गेम्स) और 1987 (नेशनल गेम्स) में चैंपियन रह चुके हैं। आईटीबीपी में नौकरी करते हुए उन्होंने 1976-1988 तक लगातार फोर्स के लिए मेडल जीते। इतना ही नहीं वे भारतीय सीनियर जिम्नास्टिक टीम के कोच और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में जज भी रहे हैं। वर्ष 2015 में उन्होंने पीआईएस मोहाली सेंटर में कोच पद का कार्यभार संभाला और जिम्नासिट में सबसे छोटी उम्र 4 से 7 साल के खिलाड़ियों को तैयार करना शुरू किया।
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