कहते हैं कि हर सफलता के पीछे एक संघर्ष भरी कहानी होती है। ऐसी ही एक संघर्ष भरी कहानी है एशियन गेम्स में ब्रॉन्च मेडल जीतने वाले भगवान सिंह की। नशे के आदी पिता को संभालने के लिए पढ़ाई छोड़ी और इसके बाद सेना ज्वॉइन कर ली। अब एशियन गेम्स में देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया।
19 साल के भगवान सिंह ने पुरुषों की लाइटवेट युगल स्कल्स स्पर्धा के फाइनल में कांस्य पदक जीता है। भगवान सिंह पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते थे लेकिन विपरीत परिस्थितियों के चलते ऐसा नहीं हो पाया। वह चंडीगढ़ से पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे थे।
पिता की बीमारी की वजह से पढ़ाई छोड़ भगवान सिंह ने भारतीय सेना ज्वॉइन कर ली और अब उनकी जिंदगी पूरी तरह से बदल चुकी है। भगवान सिंह के मुताबिक, 'वो पत्रकार बनना चाहते थे। उनके पिता मौजूदा समय में बीमार रहते हैं। पिता का एक फेफड़ा भी काम नहीं कर रहा है और उन्हें टीबी की वजह से ट्रक ड्राइविंग भी छोड़नी पड़ी।'