हौसला और इच्छाशक्ति हो तो कोई मुसीबत आपकी राह नहीं रोक सकती। अपने आसपास की नकारात्मकता को भगाएं। संयमित जीवनशैली अपनाएं और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को भी हराया जा सकता है। यह उदाहरण इन महिलाओं ने पेश किया है। हालांकि इनकी लड़ाई भी कम आसान नहीं थी।
बच्चों के लिए कैंसर से भी किया मुकाबला और जीती
यह बात साल 2017 की है। जब मैं करीब 34 साथ की थी। उस समय वह गर्भवती थी। घर में बच्चे के आने की खुशियां दी थी कि अचानक उनकी डॉक्टर ने बताया कि वह स्तन कैंसर से पीड़ित है। कुछ समय के लिए तो उन्हें समझ हीं नहीं आया कि आखिर उनके साथ क्या हो गया है। हालांकि डॉक्टर ने उन्हें बड़ी हिम्मत दी। उनका कहना था कि इसका इलाज तो डिलीवरी के बाद ही होगा। बेटी होने के दो महीने बाद उनका कैंसर का इलाज शुरू हुआ। उन्होंने बताया कि कैंसर से जंग के लिए मेरी ताकत मेरे बच्चे बने। बच्चे छोटे थे, ऐसे में उनके लिए इस बीमारी से डटकर मुकाबला करने की ठानी। मैं अपने बच्चों के लिए हारी हुई मां का उदाहरण नहीं बनना चाहती थी। आज मेरी बेटी छह साल और बेटा तेरह साल का है। दोनों ही मुझे सहयोग करते हैं । वे कभी अहसास नहीं होने देते कि मुझे कैंसर है। अब कैंसर को इतना समय हो गया है कीमोथैरेपी चल रही है। लेकिन मैं पहले से काफी बेहतर महसूस कर रही हूं। - अमृतपाल कौर, जालंधर
पहले भाई ने संभाला, फिर विद्यार्थी बने सहारा
अक्तूबर 2021 में जब कोरोना चल रहा था तो स्तन कैंसर की शिकार हो गई। मेरा भाई विदेश में है, ऐसे में अपने माता पिता के साथ रहती हूं। जब घरवालों को मेरी बीमारी का पता चला तो वह परेशान हो उठे। लेकिन मेरा भाई सबसे बड़ी ताकत बना। तीन महीने तक मेरे साथ रहा। इलाज कराया। जब वह विदेश चला गया तो मेरी एक छात्रा कीमोथैरेपी के लिए मोहाली लेकर आती थी। मेरे पढ़ाए छात्र भी हमेशा घर आकर हालचाल पूछते हैं। इससे बीमारी का मुकाबला करने में काफी ताकत मिलती रही। मेरा मानना है कि जब आपको को इतने लोग पसंद करने वाले हों और किसी भी चीज की कमी महसूस न होने दें। ऐसे में हार मानकर बीमारी के आगे घुटने टेकना गलत है। अशी विजन, शिक्षिका, पटियाला
पति व बच्चों के सहारे जीती कैंसर से जंग
सालों बाद कालेज के दोस्तों से मिलकर घर लौटी ही थी की कि अचानक तबीयत खराब हुई। शरीर में कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था। अगले ही दिन चेकअप कराया तो पता चला कि स्तन कैसर है। 2017 के दिसंबर महीने में मुझे पता चला। 2018 में पूरे साल कैंसर का इलाज चला। मेरे पति ने बहुत साथ दिया। मुझसे पहले मेरी सासू मां को भी यही बीमारी हुई थी, जिन्हें मेरे पति नहीं बचा पाए थे। ऐसे में उन्हें मुझे महसूस ही नहीं होने दिया कि कैंसर दूसरे चरण में पहुंच गया। बच्चों और दोस्तों ने हौसला दिया। मुझे कैंसर से लड़ने की ताकत दी। मुझे अपने बाल बहुत पसंद थे, लेकिन कीमोथैरेपी के कारण बालों को नुकसान पहुंच रहा था। एक दिन मैं अकेले ही पार्लर गई और अपने सिर के सारे बाल कटवा दिए। उस दिन के बाद कैंसर के इलाज में जो भी प्रक्रिया चली, मैंने हार नहीं मानी आज उसी का नतीजा है कि मैं अपना जीवन खुशी से जी रही हूं। निधि बवेजा, अंबाला
नौ साल की बच्ची कैंसर से लड़ रही है जंग
नौ साल की बनूड़ निवासी जैसिका को हड्डियों का कैंसर है। उसके माता पिता ने उसे नहीं बताया है। उसका इलाज मोहाली से ही चल रहा है । जैसिका के बारे में उनके रिश्तेदार ने बताया कि वह बहुत छोटी है लेकिन उसमें ठीक होने की सकारात्मक भावना है। वह हमेशा आम बच्चों की तरह खेलने की बात करती है। डॉक्टर खुद जैसिका की तारीफ करते हैं। परिवार के हर सदस्य को यह हिदायत है कोई भी उससे बीमार व्यक्ति की तरह बर्ताव नहीं करेगा। हमेशा उसे खुश रखें।
कैंसर और कीमोथैरेपी के संबंध में
दुनिया भर में मौतों का प्रमुख कारण कैंसर है। फेफड़े का कैंसर, स्तन कैंसर, पेट का कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर आदि कुछ ऐसे सामान्य कैंसर हैं, जिनकी खोज में काफी कुछ सामने आया है। शरीर की सामान्य कोशिकाओं के ट्यूमर कोशिकाओं में परिवर्तन होने से आमतौर पर कैंसर फैलता हैं। कैंसर के जोखिम कारकों में तंबाकू का उपयोग, शराब का सेवन, अस्वास्थ्यकर आहार, वायु या जल प्रदूषण आदि शामिल हैं। कैंसर के पता लगने और उचित उपचार से इस घातक बीमारी से मृत्यु दर को काफी कम किया जा सकता है। - डॉ अलका शर्मा एसोसिएट प्रोफेसर मेडिसिन