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Punjab: पावरकॉम के गले की हड्डी बनी मुफ्त बिजली सुविधा, सरकार पर बकाया 2500 करोड़ की सब्सिडी

Mon, 25 Mar 2024 02:39 PM IST
निवेदिता वर्मा रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला

सार

पावरकॉम को मुफ्त बिजली सुविधा भारी पड़ रही है।गरमी भी शुरू हो गई है और पीक सीजन में निर्विध्न बिजली सप्लाई यकीनी बनाने के लिए इन दिनों सिस्टम के रख-रखाव का काम जोरों पर चल रहा है। ऐसे में पैसों की कमी से मरम्मत कार्यों के लिए जरूरी सामान की खरीद-फरोख्त प्रभावित हो सकती है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पंजाब सरकार की 300 यूनिट मुफ्त बिजली सुविधा पावरकॉम के गले की हड्डी साबित हो रहा है। वर्तमान में बिजली सब्सिडी के करीब 2500 करोड़ सरकार की तरफ पेंडिंग हैं। जिसकी जल्द अदायगी न होने से पावरकॉम को अगले महीने अप्रैल में अपने मुलाजिमों को तनख्वाह व पेंशनें देने में मुश्किल हो सकती है।

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पावरकॉम के उच्चाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पेंडिंग 2500 करोड़ की बिजली सब्सिडी में करीब 1900 करोड़ का पिछला बकाया है और बाकी 600 करोड़ मार्च की पेंडिंग सब्सिडी है। उम्मीद है कि सरकार की ओर से जल्द इसका भुगतान कर दिया जाएगा। पावरकॉम की ओर से इस बारे में सरकार को रिमाइंडर भेज दिया गया है।

आंकड़ों के मुताबिक साल 2022-23 में करीब 20000 करोड़ की बिजली सब्सिडी रही थी, जबकि 2023-24 में यह बढ़कर 20200 करोड़ रहेगी। वहीं वित्तीय साल 2024-25 में बिजली सब्सिडी के बढ़कर 22000 करोड़ पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।
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वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए पावरकॉम का अनुमान
कैटेगरी                         बिजली सब्सिडी राशि (करोड़ों में)

घरेलू खपतकार                         9000
औद्योगिक क्षेत्र                         3000
खेतीबाड़ी                              10000

इस बारे में पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव इंजीनियर अजयपाल सिंह अटवाल का कहना है कि आने वाले धान सीजन के मद्देनजर पावरकॉम को इस समय बिजली सिस्टम के रख-रखाव के काम करने होते हैं। ओवर लोड ट्रांसफार्मरों को अंडर लोड किया जाता है। ट्रांसफार्मर, तारें बदलने का काम चल रहा है। अन्य भी कईं जरूरी मरम्मत कार्य होते हैं, वह सभी पीक सीजन से पहले निपटाए जाने होते हैं। लेकिन आर्थिक दिक्कत के चलते मरम्मत कार्यों के लिए जरूरी सामान खरीदने में दिक्कत हो सकती है।

पंजाबी यूनिवर्सिटी से जाने-माने अर्थशास्त्री एवं राजनीतिक मामलों के माहिर प्रोफेसर बलविंदर सिंह टिवाणा का मानना है कि मुफ्त की सुविधाएं किसी भी राज्य की आर्थिक स्थिति के लिए सही नहीं हैं। अपने वोट बैंक को मजबूत करने के लिए सियासी पार्टियां मुफ्त की सुविधाओं का ऐलान कर देती हैं और बाद में सत्ता में आने पर इसे लागू भी कर देती हैं। अगर मुफ्त की सुविधाएं देनी भी हैं, तो केवल समाज के जरूरतमंद वर्ग को ही इनका लाभ मिलना चााहिए। यह नहीं होना चाहिए कि जो व्यक्ति आयकर रिटर्न भर रहा है, उसे भी इसका लाभ मिले।

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