चंडीगढ़। नए साल 2026 की शुरुआत से नए बिजनेस आइडिया और स्टार्टअप्स को बड़ी सौगात मिलेगी। स्टार्टअप पॉलिसी के तहत उद्यमी 1 जनवरी से ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सब्सिडी और अन्य प्रोत्साहनों के लिए आवेदन कर सकेंगे। यह नीति शहर में उद्यमशीलता को बढ़ावा देने और नए स्टार्टअप्स के विकास को गति देने के उद्देश्य से लाई गई है। मुख्य सचिव एच राजेश प्रसाद के मुताबिक इस नीति का मुख्य लक्ष्य 200 नए स्टार्टअप्स की स्थापना करना है। नए और पुराने स्टार्टअप्स को पॉलिसी के जरिये अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्षम बनाना है। इसके लिए चंडीगढ़ प्रशासन इन स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर स्पोर्ट के लिए भी तैयार है।
स्टार्टअप पॉलिसी के तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त और विश्वविद्यालय-संबद्ध इन्क्यूबेटर्स को तकनीकी तौर पर खुद को अपग्रेड करने के लिए परियोजना लागत का 25 प्रतिशत यानी अधिकतम 30 लाख रुपये तक आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं, निजी इन्क्यूबेटर्स को भी 25 प्रतिशत यानी अधिकतम 20 लाख रुपये तक का सहयोग मिलेगा। स्टार्टअप के संचालन खर्च के लिए 7.5 लाख की सस्टेनेंस अलाउंस और 5 लाख रुपये वार्षिक मेंटरशिप सपोर्ट भी प्रदान किया जाएगा। पॉलिसी में यह भी शामिल किया गया है कि कोई स्टार्टअप 10 वर्ष पूरे होने या वार्षिक टर्नओवर 100 करोड़ रुपये से अधिक होने पर पात्रता खो देगा। किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या गलत जानकारी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्कूल और कॉलेज में बनेंगे ई सेल
प्रशासन की स्टार्टअप पॉलिसी के तहत शहर के स्कूल, कॉलेज और आईटी से जुड़े इंस्टिट्यूट में उद्यमिता सेल यानी ई सेल स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा स्टार्टअप फेस्ट, हैकाथॉन और इनोवेशन चैलेंज आयोजित किए जाएंगे। स्टार्टअप फेस्ट के लिए 30 लाख रुपये का वार्षिक कोष और अन्य सक्षम कार्यक्रमों के लिए 20 लाख अतिरिक्त रखे गए हैं। स्टार्टअप के लिए प्रोत्साहन के तहत वार्षिक स्टार्टअप प्रतियोगिता होगी जिसका कुल पुरस्कार 90 लाख रुपये तक होगा। इसमें शीर्ष 20 स्टार्टअप्स को 2 लाख रुपये के साथ एक वर्ष का इन्क्यूबेशन सपोर्ट, अगले 50 स्टार्टअप्स को 1 लाख रुपये और सीड-स्टेज यानी शुरुआती स्टार्टअप को 7 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाएगी। पॉलिसी में महिला स्टार्टअप और ट्रांसजेंडर वर्ग के लिए भी खास प्रावधान रखा गया है। महिला या ट्रांसजेंडर स्थापित स्टार्टअप को 2 लाख रुपये तक अतिरिक्त सहायता मिलेगी। इस नीति के लिए 4.6 करोड़ रुपये का फंड निर्धारित किया गया है।