चंडीगढ़। पीजीआई इंडोक्राइनोलॉजिस्ट विभाग के प्रोफेसर पिनाकी दत्ता को इंडोक्राइन सोसाइटी ऑफ इंडिया ने डॉ. सुभाष मुखर्जी मेमोरियल पुरस्कार 2020 से नवाजा है। डॉ. पिनाकी को यह सम्मान इंडोक्राइनोलॉजी के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया गया है। पीजीआई से यह सम्मान पाने वाले पिनाकी दत्ता दूसरे डॉक्टर हैं। इससे पहले विभाग के पूर्व प्रमुख प्रो. आरजे डैश को यह विशिष्ट सम्मान प्राप्त हो चुका है। डा. दत्ता के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में 250 से अधिक प्रकाशन हैं। इससे पहले इन्हें यंग इंवेस्टिगेटर अवॉर्ड 2005, पिट्यूटरी कांग्रेस सैन दाईगो और डीएसपी-यूकेआईईआरआई अवार्ड 2014 भी मिल चुका है। उन्हें बर्मिंघम के क्वीन एलिजाबेथ अस्पताल में शॉर्ट टर्म ऑब्जर्वरशिप भी प्राप्त हो चुकी है।
डॉ. पिनाकी की उपलब्धियां
डॉ. पिनाकी दत्ता पिट्यूटरी कांग्रेस, ब्रिटिश एंडोक्राइन सोसायटी, यूरोपियन एंडोक्राइन कांग्रेस और अमेरिकन थिअरी एसोसिएशन में शोध पत्र प्रस्तुत कर चुके हैं। डॉ. दत्ता को इंडोक्राइनोलॉजी में 20 वर्ष से अधिक का अनुभव है। डॉ. दत्ता न्यूटन भाभा ग्रांट में प्रिंसिपल इंवेस्टिगेटर भी रह चुके हैं।
क्या है डॉ. सुभाष मुखर्जी पुरस्कार
भारत में प्रथम टेस्ट ट्यूब बेबी के प्रणेता माने जाने वाले डॉ. सुभाष मुखर्जी की याद में इस पुरस्कार की स्थापना की गई है। इंडोक्राइन सोसाइटी ऑफ इंडिया की तरफ से यह पुरस्कार सराहनीय योगदान देने वाले डॉक्टरों को प्रदान किया जाता है।