कैथल। नगर परिषद द्वारा शहर के प्रमुख चौकों पर बस शेल्टर बनाने की योजना कागजों में ही दम तोड़ गई है। नगर परिषद ने वर्ष 2011 में शहर में मुख्य चौकों व स्थानों पर बस शेल्टर बनाने की योजना बनाई थी। यह योजना अभी तक सिरे नहीं चढ़ी है। बताया तो यह भी गया था कि चंडीगढ़ की तर्ज पर बस शैल्टर बनाए जाएंगे। लेकिन आज तक इस दिशा में कोई भी काम नहीं हुआ है।
बस शैल्टर न होने के कारण जिले भर से कॉलेजों व स्कूलों में आ रहे हजारों विद्यार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विद्यार्थियों को फल सब्जियों रेहड़ियों के नीचे खड़ा होकर बस आने का इंतजार करना पड़ता है। विद्यार्थियों को घंटो तक धूप में खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है।
विद्यार्थी सुनीता, प्रीति, मोनिका, अंशुल, योगिता ने बताया वह सीवन से आते है ओर कॉलेज पैदल चलकर अंबाला रोड बाई पास पर जाते है वहा पर सिर छुपाने के लिए कोई साधन नहीं है। गर्मी के मौसम में तपती धूप में खड़ा होना पड़ता है ओर बारीश के मौसम में कई बार को किताबें भी भीग जाती है। जिसके कारण काफी नुकसान हुआ है। इंदिरा गांधी महिला कॉलेज की छात्रा रिंकी, सुषमा, करूणा ने बताया कि कॉलेज के बाहर बस के इंतजार में घंटो तक खड़े रहते है। अगर कोई निश्चत बस शेल्टर का स्थान मिल जाए तो काफी हद तक परेशानी दूर हो सकती है।
शहर में इन स्थानों पर है बस शेल्टर जरूरत
शहर में पिहोवा चौक, डा. भीमराव अंबेडकर राजकीय कॉलेज, राजकीय आईटीआई व जाखौली अड्डा कन्या स्कूल के पास, विश्वकर्मा चौक, भगवान परशुराम चौक, चंदाना गेट, क्वालिटी चौक, सर छोटू राम चौक, अम्बाला रोड बाईपास, करनाल रोड बाईपास, कुरुक्षेत्र रोड बाईपास, जींद रोड बाईपास, भगत सिंह चौक, आरकेएसडी कॉलेज के बाहर, करनाल रोड पर जाट कॉलेज व इंदिरा गांधी महिला कॉलेज के बाहर बस शेल्टरों की जरूरत है।
कई बार कर चुके हैै बस शेल्टर की मांग
डा.भीमराव अंबेडकर कॉलेज के छात्र अनिल, रविन्द्र शर्मा, मोनू काजल, सुमन ने बताया कि कॉलेज के बाहर बस शेल्टर न होने के कारण उनको घंटो तक बाहर खड़ा होना पड़ता है। जिसके बारे में उन्होंने कॉलेज प्राचार्य व जिला उपायुक्त का कई बार लिखित रूप में मांग रखी है। लेकिन कोई समाधान अभी तक नहीं हुआ है।
इस संदर्भ में नगर परिषद के चेयरमैन रामनिवास मित्तल ने बताया कि चुनाव के बाद नगर परिषद द्वारा शहर में आम आदमी व विद्यार्थियों जरूरत के अनुसार बस शैल्टर की योजना का पता लगाया जाएगा कि इस पर अभी तक काम क्यों नहीं हो पाया।