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पंजाब के प्राइवेट स्कूलों से मोह हुआ भंग, 1.5 लाख विद्यार्थियों ने लिया सरकारी स्कूलों में दाखिला

Wed, 16 Sep 2020 02:44 PM IST
खुशबू गोयल अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़

सार

  • सूबे के सरकारी स्कूलों में दाखिले की दर में 14.55 प्रतिशत का हुआ इजाफा
  • आधुनिक सुधारों के साथ लॉकडाउन में ऑनलाइन कक्षाओं से हुआ सुधार
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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पंजाब में अब प्राइवेट स्कूलों से विद्यार्थियों के साथ ही अभिभावकों का मोह भंग हो रहा है। छात्र अब सरकारी स्कूलों की ओर रुख कर रहे हैं। इस कारण से इस शिक्षण सत्र में अब तक 1.50 लाख विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूलों में प्रवेश लिया है। इससे सरकारी स्कूलों में छात्रों के प्रवेश की दर में 14.55 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

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पंजाब में वर्ष 2017 तक 13309 सरकारी प्राइमरी और जूनियर, 1687 हाई स्कूल और 1913 सीनियर सेकेंडरी स्कूल संचालित हो रहे हैं। वर्तमान में इन स्कूलों में 25 लाख से अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। राज्य में शिक्षा के स्तर को बनाए रखने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा इस शिक्षण सत्र में कुछ जरूरी बदलाव किए थे, जिससे स्कूलों में प्रवेश को लेकर बेहतर परिणाम सामने आए हैं।

इस वर्ष के शिक्षण सत्र में प्री प्राइमरी से कक्षा 12 तक की कक्षाओं में 1.50 लाख नए विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। ये वे विद्यार्थी हैं, जो प्राइवेट और महंगे स्कूलों में शिक्षा का लाभ प्राप्त कर रहे थे। विभागीय प्रवक्ता के अनुसार वर्ष 2019 में सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 23,52,112 थी, जो इस साल बढ़कर 26,94,424 हो गई है।

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पीटीएम में होगा विद्यार्थियों का मूल्यांकन

लॉकडाउन के बाद राज्य में यह पहली बार होगा कि बच्चों की पढ़ाई का मूल्यांकन करने के लिए अभिभावक-अध्यापक मीटिंग (पीटीएम) का सिलसिला भी शुरू कर दिया है। इन मीटिंग में 27 लाख से अधिक विद्यार्थियों के अभिभावकों द्वारा हिस्सा लेने की उम्मीद है। मीटिंगों का यह दौर 14 सितंबर से शुरू हो चुका है।

अभिभावकों के साथ होगी चर्चा
पीटीएम मीटिंग में विभागीय अधिकारी अभिभावकों के साथ चर्चा करेंगे। चर्चा में ऑनलाइन मीटिंगें करके उनको आनलाइन पढ़ाई की महत्ता संबंधी जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही उनकी समस्याओं का पता लगाया जाएगा और उनके बच्चों की पढ़ाई में और सुधार लाने के संबंध में सुझाव लिए जाएंगे। इसके साथ ही मिड-डे-मील, किताबों का वितरण, पीएएस की तैयारी और महत्ता, पंजाब एजुकेयर एप और सप्लीमेंटरी मैटीरियल, और बच्चों की पढ़ाई के अलावा उनके स्वास्थ्य संबंधी विचार-विमर्श किया जाएगा।
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