चंडीगढ़। सेक्टर 45ए में शनिवार रात 23 वर्षीय छात्र को तीन कुत्तों ने घेर लिया। दो कुत्तों को तो छात्र ने भगा दिया, लेकिन एक ने पैर में काट लिया। रात में लेकर परिजन सेक्टर 19 डिस्पेंसरी पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने छात्र को सुबह खाली पेट बुलाया। सुबह डिस्पेंसरी में जो एंटी रैबीज दी गई, छात्र को रिएक्शन कर गई। डॉक्टरों की सलाह पर बाहर से 21 हजार रुपये के एंटी रैबीज इंजेक्शन और सीरम खरीदकर लाने पर छात्र को लगाया गया।
कुत्तों का आतंक कम होने की बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है। लगातार घटनाओं से लोगों में काफी डर का माहौल है। लोग बच्चों को पार्क में अकेला नहीं छोड़ते, वहीं बुजुर्ग भी सुबह सैर करते समय अपने साथ डंडा लेकर जाने लगे हैं। सेक्टर 45 ए निवासी अभिमन्यु शनिवार रात अपने लिए दुकान से कुछ लेने गया था। लौटते समय तीन कुत्तों ने उसे घेर लिया। दो कुत्तों को जैसे तैसे छात्र ने भगा दिया, लेकिन एक कुत्ते ने छात्र के पैर में काट लिया। घर पहुंचकर छात्र ने परिजनों को बताया। परिजन तत्काल छात्र को लेकर सेक्टर 19 स्थित डिस्पेंसरी लेकर गए। जहां डॉक्टरों ने सुबह खाली पेट आने को कहा। सुबह छात्र को डिस्पेंसरी में एंटी रैबीज दी गई, लेकिन वह रिएक्शन कर गई। डॉक्टरों ने परिजनों को बाहर से दवा लाने को कहा। परिजन बाहर से 21 हजार रुपये के इंजेक्शन लेकर आए। तब जाकर छात्र को एंटी रैबीज इंजेक्शन और सीरम लगाया गया।
आठ लाख रुपये खर्च, सुझावों पर अमल अब तक नहीं
निगम ने 28 सितंबर को आवारा कुत्तों के काटने की समस्या को लेकर एक राष्ट्रीय स्तर का सेमिनार करवाया था। इसमें निगम ने आठ लाख रुपये खर्च किए थे। सेमिनार में देशभर से विशेषज्ञ पहुंचे थे। पूरे दिन चले कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कुछ सुझाव दिए थे, लेकिन आज तक किसी भी सुझाव पर कोई अमल नहीं हो सका। अब सवाल उठता है कि जब इन सुझावों पर कोई अमल नहीं होना था तो लाखों रुपये खर्च कर फिर क्यों इतना बड़ा आयोजन किया गया।
जब तक लोग नहीं होंगे जागरूक घटनाओं में नहीं आएगी कमी
सेनिटेशन कमेटी के सदस्य और भाजपा पार्षद महेश इंदर सिंह सिद्धू का कहना है कि लोग जब तक जागरूक नहीं होंगे, घटनाओं में कमी नहीं आएगी। सुखना लेक पर कभी आवारा कुत्ते नहीं दिखाई देते थे, लेकिन अब काफी कुत्ते उस क्षेत्र में पहुंच गए हैं। एक दिन दो महिलाएं थैला भरकर खाद्य सामग्री लेकर आईं और खिलाने लगीं। ऐसे ही प्रत्येक सेक्टर में लोग स्ट्रे डॉग्स को खाना खिलाते हैं, जबकि उनकी जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है। वहीं, रीलोकेशन की समस्या भी बड़ी है। कुत्तों को कहीं और भेजना संभव नहीं है, लेकिन इस ओर भी ध्यान देना होगा।
कई बार हो चुके हैं झगड़े, पुलिस को भी आना पड़ा
स्ट्रे डॉग्स को खाना खिलाने को लेकर कई बार झगड़ा हो चुका है। कुछ दिन पूर्व ही सेक्टर 22 में नुक्कड़ ढाबा के संचालक ने एक व्यक्ति को आवारा कुत्ते को चिकन खिलाने से मना किया तो उसे युवक और उसके साथियों ने डंडों से पीट दिया था। सेक्टर 8 में निगम की टीम आवारा कुत्ते को लेने पहुंची तो एक महिला ने पुलिस को बुलाकर हंगामा कर दिया। महिला का आरोप था कि पड़ोसी निगम की टीम को बुलाकर उनके कुत्ते को यहां से हटवा रहे हैं। पुलिस के आने के बाद मामला शांत हुआ था।
कुत्तों की नसबंदी के लिए नहीं हो सका टेंडर
फिलहाल पहली कंपनी का टेंडर खत्म हो चुका है। निगम नई कंपनी को टेंडर देकर कुत्तों के आपरेशन की जिम्मेदारी देना चाहती है, लेकिन तीन बार टेंडर करने के बावजूद कोई कंपनी नहीं आई है। उसके बाद एफएंडसीसी की बैठक में तय किया कि पंजाब की तर्ज पर भी यहां वेटरिनरी डॉक्टरों को रखा जा सकता है।
कोट
जहां कहीं भी आवारा कुत्तों को लेकर सूचना मिलती है, नगर निगम की टीम पहुंचती है। फिलहाल कुत्तों के नसबंदी को लेकर टेंडर किया जाना है। डॉग बाइट की घटनाओं में कमी लाने के लिए अपने स्तर पर कमी लाने का प्रयास कर रहे हैं।
-केकेयादव, कमिश्नर नगर निगम