पीजीआई-पीयू रिपोर्ट में खुलासा, सैटेलाइट निगरानी में पकड़े जा रहे ऐसे मामले जो बोर्ड के रिकॉर्ड में नहीं
मोहाली में सीएक्यूएम का सेल स्थापित, 18 जिलों में ड्रोन और टीमों से निगरानी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब में पिछले साल की तुलना में पराली जलाने के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक सितंबर से अब तक राज्य में 179 स्थानों पर पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं। पीजीआई और पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार कई मामले सैटेलाइट निगरानी में पकड़े गए हैं, जो पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) के आंकड़ों में शामिल नहीं हैं।
रिपोर्ट के अनुसार पीपीसीबी ने 15 सितंबर से निगरानी शुरू की थी, जबकि पीजीआई-पीयू टीम एक सितंबर से ही मामलों पर नजर रख रही है। इसी वजह से दोनों एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर दिखाई दे रहा है। पंजाब में अब तक पराली जलाने के मामलों में पिछले वर्ष की तुलना में 1.29 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, हरियाणा में भी अब तक 125 मामले सामने आ चुके हैं।
पीजीआई के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. रविंद्र खैवाल ने बताया कि पिछले साल की तुलना में मामलों में वृद्धि हुई है, हालांकि 2012 के बाद से दीर्घकालिक रुझान देखें तो घटनाओं में कमी आई है। उन्होंने कहा कि धान की कटाई तेज होने के बाद वास्तविक स्थिति और स्पष्ट होगी।
ड्रोन और सैटेलाइट से निगरानी
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के निर्देश पर पराली जलाने की घटनाओं पर ड्रोन और सैटेलाइट के जरिए नजर रखी जा रही है। आयोग ने मोहाली में विशेष सेल स्थापित किया है। संगरूर, तरनतारन, फिरोजपुर, मुक्तसर, बठिंडा, अमृतसर, मोगा, मानसा, फाजिल्का, पटियाला, लुधियाना, कपूरथला, फरीदकोट, बरनाला, मलेरकोटला, गुरदासपुर, जालंधर और फतेहगढ़ साहिब समेत 18 जिलों में विशेष निगरानी की जा रही है।