पंजाब के स्पेशलिस्ट डॉक्टरों ने सेहतमंत्री सुरजीत ज्याणी के भरोसे के बाद अपनी प्रस्तावित हड़ताल फिलहाल टाल दी है। अगले हफ्ते ज्याणी के साथ बैठक के बाद इस बारे में फैसला किया जाएगा।
लुधियाना के मदर-चाइल्ड अस्पताल में हुई बच्चों की मौत के मामले में डॉ. अलका मित्तल के निलंबन से स्पेशलिस्ट डॉक्टर रोष में थे। लुधियाना के डॉक्टरों ने शुक्रवार और पूरे पंजाब के डॉक्टरों ने शनिवार को हड़ताल करने का फैसला किया था। डॉक्टरों ने कोई भी ऑपरेशन न करने की धमकी दी थी।
साथ ही इमरजेंसी सर्जरी या डिलीवरी करने की बात कही थी। वीरवार को सेहतमंत्री ज्याणी ने फोन पर डॉक्टरों के साथ बात की, जिसके बाद हड़ताल टालने का फैसला किया गया। पीसीएमएस स्पेशलिस्ट डॉक्टर एसोसिएशन (पंजाब) के प्रधान डॉ. कश्मीर सिंह सोहल ने कहा कि ज्याणी ने आश्वासन दिया है कि जांच निष्पक्ष होगी।
किसी भी निर्दोष पर कोई कार्रवाई नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की अन्य लंबित मांगों पर विचार करने के लिए अगले हफ्ते बैठक बुलाने का भी भरोसा दिया है। बैठक के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।
डॉ. सोहल ने कहा कि उनकी कई मांगें लंबे समय से पेंडिंग हैं। स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को एमबीबीएस के बराबर स्केल दिया जा रहा है। बेसिक-पे पर पचास प्रतिशत या कुल वेतन पर तीस प्रतिशत बढ़ाया जाए।
बंद इन्क्रीमेंट शुरू किए जाएं। वेतन का 15 प्रतिशत कन्वेयंस अलाउंस दिया जाए। क्योंकि डॉक्टरों को अपने वाहन पर कोर्ट, कैंप व इमरजेंसी में जाना पड़ता है। एकेडमिक अलाउंस सिर्फ डेढ़ सौ रुपये है, उसे बढ़ाया जाए।