विजय सौदाई के उपन्यास दलित का रविवार को विमोचन किया गया। इसमें भारतीय राजनीति के जातिवादी और पतित स्वरूप पर कटाक्ष किया गया है।
उपन्यास की कहानी एक दलित नायक चंदर के इर्द-गिर्द घूमती है।
वह अपने समुदाय के वोटों और अपनी चालाकी से मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचता है मगर सत्ता की दलदल में वह इस तरह फंसता है कि उसका अपना समाज उसके खिलाफ हो जाता है।
रविवार को होटल अरोमा में इस उपन्यास का विमोचन किया गया।
विजय सौदाई ने कहा कि इस उपन्यास का थीम उन्होंने समाज से ही लिया है।