रेलवे स्टेशन की शोभा बढ़ाने हेरीटेज स्टीम इंजन मंगलवार को चंडीगढ़ पहुंच गया। इसे स्टेशन के बाहर बनाए गए ट्रैक पर फिक्स भी कर दिया गया। राजकोट से इसे स्टेशन पर धरोहर के रूप में सहेजने के लिए लाया गया है।
जिस एक मीटर गेज ट्रैक पर यह इंजन दौड़ता था, अब देश में कहीं नहीं है। इंजन के स्टेशन पर लगने के बाद पहले ही दिन बहुत से लोगों ने इसके साथ फोटो खिंचवाई।
प्वाइंटर
- स्टीम इंजन को मैकेनिकल इंजीनियरिंग की बड़ी उपलब्धि माना जाता है। 1960 में टेल्को कंपनी ने इस इंजन को बनाया था। 1962 में उतारा था पटरी पर।
-उस समय अपने पीछे लगी बोगियों में हजारों यात्रियों को ले जाना वाला यह इंजन अब एक कदम भी आगे नहीं नहीं बढ़ सकता।
- कालका-शिमला को छोड़ सभी जगह 1.67 मीटर ब्रॉड गेज ट्रैक पर ही अब ट्रेनें चलती हैं।
- कालका-शिमला नैरोगेज यानी प्वाइंट 76 मीटर गेज ट्रैक है।
- रेवाड़ी शेड में सभी तरह के मीटर गेज ट्रैक हैं लेकिन उन पर फिल्म, सीरियल की शूटिंग के लिए ही स्पेशल बुकिंग पर ट्रेन चलती है।
स्टीम इंजन की खासियत
इस स्टीम इंजन का कोयला और पानी भरने के बाद 101 टन वजन होता था। खाली इंजन का वजन 70 टन है। इंजन से उत्पन्न होने वाली भाप से ही इसकी लाइटें जलती थी। इसकी सीटी भी भाप से उत्पन्न ऊर्जा से बजती थी।
इंजन को दी जाएगी पहले जैसी लुक
54 साल पुराने इस इंजन को बिलकुल वैसी ही लुक दी जाएगी। जैसा यह ट्रैक पर चलते समय दिखता था। रेलवे प्रशासन इस पर पेंट करने के साथ इसे रिपेयर भी करेगा।