चंडीगढ़। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी बब्बर खालसा के आतंकी जगतार सिंह हवारा के खिलाफ सेक्टर-36 थाने में दर्ज 18 साल पुराने मामले में मंगलवार को जिला अदालत में चार गवाहों की गवाही हुई।
इनमें से एक गवाह तत्कालीन इंस्पेक्टर रजिंदर सिंह थे, जिन्होंने हवारा को 18 साल पहले हथियारों के साथ पकड़ा था। इस मामले में 11 अगस्त को आतंकी हवारा के खिलाफ आरोप तय होने के बाद 4 सितंबर को शुरू हुए ट्रायल के दौरान पांच सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों के बयान भी दर्ज कराए जा चुके हैं। ट्रायल शुरू होने के बाद मामले में मंगलवार को दूसरी सुनवाई हुई। इसमें यूटी पुलिस के सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर रजिंदर सिंह के अलावा तत्कालीन सब इंस्पेक्टर राम कुमार, ड्राफ्टमैन और आर्मर के भी बयान दर्ज किए गए। अब मामले में अगली सुनवाई के लिए 18 सितंबर की तारीख तय की गई है। साल 2005 में सेक्टर-36 और सेक्टर-17 थाने में आतंकी जगतार सिंह हवारा के खिलाफ दो आपराधिक मामलों में देश के खिलाफ जंग छेड़ने, हथियार जुटाने, दंगा भड़काने के लिए उकसाने वाला कृत्य करने और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं समेत आर्म्स एक्ट और विस्फोटक अधिनियम की धाराएं लगाते हुए केस दर्ज किया गया था।
तिहाड़ में काट रहा उम्रकैद की सजाबब्बर खालसा इंटरनेशनल का आतंकी जगतार सिंह हवारा इस वक्त दिल्ली के तिहाड़ जेल में सजा काट रहा है। उसे पूर्व सीएम बेअंत सिंह हत्याकांड में फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। बाद में इसे उम्रकैद में तब्दील कर दिया गया था। बता दें कि हवारा समेत अन्य आतंकियों ने 31 अगस्त 1995 को पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह को पंजाब सिविल सचिवालय परिसर में बम धमाके में मारा था। बाद में आतंकी हवारा अपने दो साथियों समेत बुड़ैल जेल से जनवरी 2004 में 94 फीट लंबी सुरंग खोद फरार हो गया था, लेकिन बाद में सभी पकड़े गए थे।