पीजीआई चंडीगढ़ के यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी में इलाज के दौरान डॉक्टर की ओर से गलत तरीके से छुए जाने के आरोप के मामले में 27 सितंबर को पीड़िता का बयान दर्ज किया जाएगा। जांच कमेटी ने शनिवार को मरीज से संपर्क कर बयान दर्ज किए जाने की जानकारी दी। वहीं, यूरोलॉजी विभाग के जिस डॉक्टर पर आरोप लगाया गया है, वह अब भी क्लीनिकल प्रैक्टिस कर रहे हैं। वहीं, संस्थान के ही कुछ डॉक्टरों का कहना है कि मामले की जांच होने तक संबंधित डॉक्टर को ओपीडी में बैठने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।
बता दें कि एक महिला मरीज ने ओपीडी में जांच के दौरान यूरोलॉजी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. शैंकी सिंह के खिलाफ छेड़खानी की शिकायत की है। आरोप है कि मरीज की ओपीडी के बंद कमरे में अकेले जांच की गई और डॉक्टर ने महिला अटेंडेंट के बिना उसे गलत तरीके से छुआ।
इस संबंध में पीजीआई निदेशक प्रोफ विवेक लाल का कहना है कि मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई है। कमेटी में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्रमुख प्रो. वनिता जैन, डॉ. तनवीर समरा, डॉ. तरुष गुप्ता, डॉ. नवीन पाण्डेय और पीजीआई के लॉ ऑफिसर शामिल हैं। बता दें कि जांच कमेटी 14 सितंबर को गठित की गई थी लेकिन सात दिन बीतने के बाद भी मरीज से बयान लेने का प्रयास किया जा रहा है।