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प्रशासन की तैयारी, सिर्फ दो बचेंगे स्टेट हाईवे बाकी रहेंगे 'लिकर-वे'

Tue, 07 Mar 2017 01:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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नाक बचाने को एक-दो रोड को स्टेट हाइवे ही रखेगा प्रशासन - फोटो : अमर उजाला
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शराब के ठेकों को बचाने के लिए स्टेट हाइवे का स्टेटस खत्म करने से ज्यादा फजीहत न हो, इसलिए प्रशासन एक-दो मुख्य मार्गों को स्टेट हाइवे ही रखने की तैयारी में है। इनमें मध्य मार्ग, दक्षिण मार्ग, उद्योग पथ और जनपथ जैसे मार्ग हो सकते हैं, जो दूसरे शहरों से जुड़ने वाले मुख्य मार्ग हैं। इनसे ट्रैफिक की सबसे ज्यादा आवाजाही भी रहती है। हालांकि दक्षिण मार्ग पिकाडली चौक तक नेशनल हाइवे में आता है। इसलिए यहां बदलाव नहीं होगा। बाकी सभी मार्ग मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड हो जाएंगे। ऐसे में जो स्टेट हाइवे रहेंगे, उनसे ही शराब के ठेके हटाने पड़ेंगे बाकी मार्गों पर ठेके बने रहेंगे।
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2005 में स्टेट हाइवे की अधिसूचना
2005 में वी-1, वी-2 और वी-3 सड़कों को प्रशासन ने निगम को न देकर अपने पास रखने के लिए स्टेट हाइवे का दर्जा देने की अधिसूचना जारी की थी। चंडीगढ़ के सभी मुख्य मार्गों पर करीब 80 शराब के ठेके आते हैं जिन पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद बंद होने की तलवार लटक रही है। 

ये हैं सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट और नेशनल हाइवे से 500 मीटर दायरे में शराब के ठेके, पब और बार नहीं होने के आदेश जारी किए हैं।
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सिर्फ कागजी तौर पर स्टेट हाइवे

- फोटो : File Photo
फिर भी रोड निगम को देने के मूड में नहीं प्रशासन
स्टेट हाइवे की अधिसूचना मामले में प्रशासन ने जो कमेटी गठित की थी वह वरिष्ठ अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है। बताया जा रहा है कि मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड करने के बाद भी प्रशासन इन रोड को नगर निगम को देने के मूड में नहीं है। इनकी मेंटेनेंस से लेकर दूसरे हक प्रशासन अपने पास ही रखेगा। इसकी मुख्य वजह शहर में आए दिन होने वाली वीआईपी विजिट हैं। मेंटेनेंस वर्क की वजह से फजीहत न हो इसलिए भी प्रशासन इन्हें अपने पास रखेगा। गोपनीय तरीके से इस मामले में काम हो रहा है। इस रिपोर्ट पर अंतिम फैसला लेने के बाद प्रशासक वीपी सिंह बदनौर की मंजूरी ली जानी है। अगले एक दो दिनों में प्रशासक फैसले पर अपनी मुहर लगा सकते हैं। 31 मार्च को पुरानी एक्साइज पॉलिसी खत्म हो जाएगी। 1 अप्रैल से नई पॉलिसी लागू होनी है। ठेके भी दोबारा से अलॉट किए जाने हैं। पॉलिसी बनाने से पहले प्रशासन यह मसला सुलझाने में जुटा है।

सिर्फ कागजी तौर पर स्टेट हाइवे
चंडीगढ़ के स्टेट हाइवे सिर्फ कागजी तौर पर हैं। इसके लिए किसी तरह के नियम कायदों का भी ध्यान नहीं रखा गया। निगम केपास रोड जाने से मेंटेनेंस वर्क भी नगर निगम को ही करना होता। मेंटेनेंस वर्क के लिए मोटे टेंडर होते हैं, जिससे जेब गर्म होने के आरोप भी लगते रहते हैं। ऐसे में अपने स्वार्थ के लिए 2005 में मुख्य मार्गों को कागजी तौर पर स्टेट हाइवे का दर्जा दे दिया गया। बजाए यह देखे कि स्टेट हाइवे के लिए नियम कायदे अलग होते हैं, जिन मार्गों को स्टेट हाइवे का दर्जा दिया गया है वे सभी शहर के अंदर आते हैं जबकि नियमों अनुसार स्टेट हाइवे मुख्य तौर पर शहर से बाहर ही होते हैं। उनको मेंटेन करने के नियम और सुरक्षा के पहलू भी अलग होते हैं। शहर से बाहर होने के कारण स्टेट हाइवे पर स्पीड लिमिट भी अलग होती है। जबकि चंडीगढ़ में सभी रोड शहर के अंदर हैं इसलिए यहां स्पीड लिमिट भी कम है।
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