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Chandigarh News: राज्य पक्षी काले तीतर पर मंडराने लगा खतरा, कम होते जा रहे प्राकृतिक आवास

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विश्व पक्षी दिवस पर विशेष
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खेतों में कीटनाशक व पराली जलाए जाने से पक्षियों के प्रजनन पर पड़ा रहा असर

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के राज्य पक्षी काले तीतर के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। इनकी संख्या में लगातार कमी आ रही है। किसी जमाने में यह पक्षी हर गांव में दिख जाता था। गुनगुनी सर्दियों में इसकी मधुर आवाज सुनकर लोग मंत्रमुग्ध हो जाते थे। मगर अब ऐसा नहीं है। सरकार भी काले तीतर को संरक्षित करने को लेकर गंभीर नहीं है। 48 साल के बाद इनकी संख्या को लेकर कोई गणना नहीं हुई है। ऐसा कोई आंकड़ा भी उपलब्ध नहीं है, जिससे पता चल सके कि इनकी कितनी संख्या है। वहीं, राज्य में इस पक्षी के लिए कोई ब्रीडिंग सेंटर नहीं है। रेवाड़ी में ब्रीडिंग सेंटर बनाने की कोशिश की गई थी, मगर उसमें सफलता नहीं मिली। हरियाणा सरकार ने साल 1976 में काले तीतर को राज्य पक्षी घोषित किया था। हालांकि सरकार की ओर से चलाए गए जागरूकता कार्यक्रमों और सख्ती की वजह से काले तीतर के शिकार में कमी आई है। करीब आठ से दस साल पहले काले तीतर का धड़ल्ले से शिकार किया जाता था।
रोहतक के पक्षी विशेषज्ञ राकेश अहलावत ने बताया कि इन पक्षियों का आवास खेत के साथ लगती झाड़ियों व पंचायती जमीन पर लगे पेड़-पौधों में होता है। अब पंचायत की जमीन पर खेती होने लगी है। अधिकतर पंचायत की जमीन को लीज पर दे दिया गया है। इससे इनके प्राकृतिक आवास उजड़ने लगे हैं। वहीं, ये पक्षी खेतों में अंडे देते हैं। अब खेतों में मशीनों से काम होने लगा है। इस वजह से उनके अंडे भी नष्ट हो रहे हैं। वहीं, खेतों में कीटनाशक के इस्तेमाल और पराली जलाए जाने से इनके प्रजनन पर भी असर पड़ा है। काले तीतर विशेष तौर पर अनाज, घास के बीज, कीड़े व चीटियों को खाते हैं। खेत से इन कीड़ों को हटाने के लिए धड़ल्ले से कीटनाशक का इस्तेमाल किया जाता है। इस वजह से इनकी संख्या घटी है।
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फरवरी में करता ब्रीडिंग, एक बार में आठ से ज्यादा अंडे देता है माता काला तीतर

काला तीतर (मादा) एक बार में आठ से ज्यादा अंडे देता है। इन अंडों की अधिकतम संख्या 12 तक पहुंच जाती है। फरवरी के महीने में यह ब्रीडिंग करता है। इसे आमतौर पर झाड़ीदार इलाकों में रहना पसंद होता है। कुछ खेतों में भी रहना पसंद करते हैं। यह बेहद शर्मिला पक्षी होता है। दिखने में यह काफी सुंदर होता है। इसकी उड़ान ज्यादा नहीं होती। इसकी आवाज काफी मधुर होती है। काले तीतर के शिकार पर तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।
हरियाणा में 500 से ज्यादा प्रजातियां
हरियाणा में रेजिडेंट व माइग्रेटरी पक्षियों की 500 से ज्यादा जातियां देखने को मिलती हैं। इसके अलावा जगह-जगह बने छोटे वैटलैंड में भी पक्षियों का आना-जाना रहता है। हरियाणा में कुल 42478 हेक्टेयर वेटलैंड एरिया है। हरियाणा के पंचकूला, यमुनानगर, कैथल में सबसे ज्यादा वैटलैंड हैं। पक्षी विशेषज्ञ ने बताया कि हरियाणा में पक्षियों के आने की बड़ी वजह यह है कि उन्हें यहां अनुकूल माहौल मिलता है।
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- समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाकर ग्रामीणों को बताया जाता है कि वह पक्षियों के प्राकृतिक आवासों को नष्ट न करें। वहीं, फाॅरेस्ट गार्ड की भी गतिविधियां बढ़ाई गई हैं। इससे इन पक्षियों के शिकार में कमी आई है।
- अनंत प्रकाश पांडेय, चीफ कंजरवेटर फॉरेस्ट।
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