ग्रुप सी व डी कर्मचारियों को तरक्की देने की नीति को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन कर्मचारियों को तरक्की दी गई वह तीन महीने में वापस ले ली जाए।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2006 में एक फैसले में कहा था कि तरक्की में आरक्षण देने से पहले कर्मचारियों का डाटा एकत्र किया जाना चाहिए। इसके बाद यदि आरक्षित श्रेणी के कर्मचारियों को तरक्की देने की जरूरत है, तभी तरक्की दी जाए। इस फैसले के बाद से हरियाणा में ऐसे ही तरक्कियां दी जाती रही थीं और वर्ष 2013 में सरकार ने तरक्की नीति तैयार की।
इसमें ग्रुप सी व डी में अनुसूचित जातियों को 20 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था। परिवहन, पुलिस व सिंचाई विभाग के अनेक कर्मचारियों ने तरक्की नीति में अनुसूचित जाति श्रेणी केकर्मचारियों को आरक्षण देने को चुनौती दी थी।
एडवोकेट मनजीत सिंह के माध्यम से दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि हरियाणा सरकार ने तरक्की नीति बनाते वक्त डाटा एकत्र नहीं किया। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का उल्लंघन किया गया।
लिहाजा तरक्की नीति में आरक्षण के प्रावधान को रद्द किया जाए और नीति सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक ही आरक्षण का प्रावधान बनाया जाना चाहिए। सभी पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस राजेश बिंदल की एकल बेंच ने मामले का फैसला सुरक्षित रख लिया था।
यह फैसला शुक्रवार को सुनाया गया। याचिकाओं में तरक्की नीति में आरक्षण रद्द करने की मांग की थी। बेंच ने समूची तरक्की नीति ही रद्द कर दी है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कहा है कि जो तरक्कियां दी गईं, सरकार वह तीन महीने में वापस लेकर संबंधित कर्मचारियों को रिवर्ट करे।
हाईकोर्ट के इस फैसले से हजारों कर्मचारियों की तरक्की पर तलवार लटक गई है। हालांकि तरक्की बचाए रखने के लिए अभी प्रतिवादियों के पास डिवीजन बेंच में अपील का रास्ता बचा है, लेकिन फिलहाल सरकार को तरक्की वापस लेने का आदेश हो गया है।