अब अगर किसी एरिया में कोई गंदगी फैलाता है या फिर कोई खुले में सिगरेट पीता मिला तो रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के (आरडब्ल्यूए) के प्रधान सहित कुछ पदाधिकारी भी उसका चालान काट सकते हैं। शुरुआत में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर तीन से चार सेक्टरों में चलाया जाएगा। इसकी पुष्टि गृह सचिव अनुराग अग्रवाल ने की है।
गृह सचिव का कहना है कि प्रशासन चाहता है कि वह रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशनों के साथ मिलकर काम करे। रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन अपने एरिया की सफाई व्यवस्था की अच्छी तरह से देखरेख कर सकती हैं। अग्रवाल का कहना है कि एंटी स्मोकिंग सहित कई कानून प्रशासन बना चुका है, अब समय है उन्हें लागू करवाने का।
गृह सचिव के अनुसार इस समय सफाई व्यवस्था पर निगरानी करने के लिए एक सेनिटरी इंस्पेक्टर होता है जिसके पास 25-25 सेक्टरों की जिम्मेदारी होती है। एक इंस्पेक्टर सभी सेक्टरों की सफाई पर नजर नहीं रख सकता। इसलिए रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशनों को यह जिम्मेवारी दी जा रही है।
कमेटी होगी गठित
फासवेक अध्यक्ष बलजिंद्र सिंह बिट्टू का कहना है कि सफाई व्यवस्था की हालत ज्यादा अच्छी नहीं है। सफाई कर्मचारियों की जवाबदेही संबंधित एसोसिएशनों के समक्ष होनी चाहिए। उनका कहना है कि प्रशासन ने उन्हें सैनिटेशन की हालत को सुधारने के लिए एक कमेटी गठित करने का निर्णय लिया है। उसमें एसोसिएशन के पदाधिकारी, थाना प्रभारी के अलावा दो सरकारी कर्मचारी शामिल होंगे। पूरी कमेटी को गंदगी फैलाने वालों को चालान काटने की पावर होगी। सफाई कर्मचारियों की हाजरी की जिम्मेवारी भी एसोसिएशन के पास होनी चाहिए।
पब्लिक टायलेट लेने पर मिलेंगे 8500 रुपये
एरिया की ग्रीन बेल्ट के साथ साथ अब एसोसिएशन अपने यहां की पब्लिक टायलेट भी रख रखाव के लिए ले सकती हैं। इसके बदले में नगर निगम की ओर से 8500 रुपये प्रति माह दिए जाएंगे। सेक्टर-20 के हाउस ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश सूद का कहना है कि वह अपने एरिया का पब्लिक टायलेट एसोसिएशन की ओर से चला रहे हैं। गृह सचिव ने कहा कि जिस एरिया में भी ड्रग्स और नशा बिकते हुए पाया जाएगा, उस एरिया के थाना प्रभारी को निलंबित किया जाएगा।