ऐसे बढ़ सकती है गौरेया की संख्या
आसपास देखे कि कहां पर गौरेया आती हैं। यदि ऐसा है तो वहां पर नियमित रूप से दाना-पानी रखें। उसके लिए घोंसला बनाकर उसे सुरक्षित माहौल दें। यह एक लंबी प्रक्रिया है। धीरे-धीरे इनकी संख्या में बढ़ोतरी होगी। उनके लिए कृत्रिम घोंसले भी बना सकते हैं। बाजार में भी बहुत से बने बनाए घोंसले आते हैं। एक बात जरूर ध्यान रखनी होगी कि गौरेया को नमक वाला खाना नहीं डालना चाहिए। नमक उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है।
जहां पर चिड़िया आती हैं, यदि वहां पर प्रयास किए जाएं तो इनकी संख्या जरूर बढ़ेगी। चंडीगढ़ के कुछ ही जगहों में गौरेया हैं। मेरे घर में दो तीन गौरेया थीं। उन्हें दाना-पानी दिया, सुरक्षा दी। 20 सालों में जाकर उनकी संख्या 25 से 30 हो गई है। कोशिश करें और साथ में धैर्य भी रखें। यदि इन्हें बचाया नहीं गया तो यह चिड़िया विलुप्त हो जाएगी।
-एमएस सेखों, प्रेसिडेंट चंडीगढ़ बर्ड्स क्लब
चंडीगढ़ में बने आधुनिक मकानों की वजह से यहां पर गौरेया बहुत कम हैं। ये अपने घोंसले उन जगहों पर बनाती हैं, जहां पर सुराख हो। गौरेया को न तो घर मिल रहा है और न ही दाना-पानी। पहली कोशिश हमें यह करनी चाहिए कि जहां पर यह चिड़िया हो, उसे सुरक्षित करने के लिए कदम उठाएं। उन्हें खाना और रहने की जगह मुहैया करवाएं। -रीमा ढिल्लन, बर्ड वॉचर चंडीगढ़