हरियाणा के दक्षिण हिस्से में स्थित रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, नारनौल, भिवानी और चरखी दादरी भूमिगत पानी के गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। वहीं, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल और मेवात पानी की कमी के साथ दूषित पानी की समस्या से लोग जूझ रहे हैं।
पानी की कमी की वजह से यह इलाके आर्थिक आधार पर भी पिछड़ गए हैं। दक्षिण हरियाणा के नेताओं ने समय-समय पर पानी के संकट को पार पाने के लिए कई लड़ाइयां लड़ीं, इनमें कुछ हद तक तो सफलता मिली है मगर अभी बहुत कम होना बाकी है।
हाल ही में हरियाणा सरकार ने राजस्थान को पानी देने के लिए एक करार किया है। इसके तहत मानसून के दिनों में यमुना का पानी राजस्थान में पहुंचाया जाएगा। हरियाणा सरकार के इस फैसले से दक्षिण हरियाणा के लोग काफी नाराज हैं।
कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दलों ने इसका विरोध जताया है और इस समझौते को रद्द करने की मांग कर रही हैं। दक्षिण हरियाणा में कांग्रेस इस मुद्दे को उठा रही है। दक्षिण हरियाणा में जल आंदोलन से जुड़े व पूर्व विधायक रघु यादव का कहना है कि सरकार को पहले अपने लोगों के बारे में सोचना चाहिए था। हम लोग पिछले चार दशक से मांग कर रहे हैं कि यमुना का पानी जो हर साल लोगों को नुकसान पहुंचाता है उसे साहिबी नदी के माध्यम से दक्षिण हरियाणा के हिस्से में पहुंचाया जाए, मगर सरकार के कानों में जू तक नहीं रेंग रही।
पानी का संकट क्यों
दक्षिण हरियाणा यह स्थिति पहले ऐसी नहीं थी। राजस्थान से निकलने वाली साहिबी, कृष्णावती और दोहान दक्षिण हरियाणा के जिलों से होकर बहती थी। साहिबी में अरावली की पहाड़ियों से बरसाती पानी आता था। इससे इन जिलों को काफी फायदा पहुंचता था। साहिबी नदी बारिश के दिनों में काफी ताकत से बहती थी। इसके पानी से दिल्ली काफी प्रभावित होता था। पहले 1964 और फिर 1977 में बांध बनाकर इस पानी को दिल्ली और हरियाणा में आने से रोक दिया गया। इसके बाद राजस्थान सरकार ने कृष्णावती और दोहन नदी में बांध बनाकर दोनों नदियों के पानी को दक्षिण हरियाणा में आने से रोक दिया गया। इन नदियों से हरियाणा को पानी मिलाना बंद हुआ तो लोग भूमिगत पानी पर निर्भर हो गए। खेती और और घरेलू जरूरत का पानी नीचे से निकाले जाने लगा और पानी का भूजल स्तर नीचे गिरता चला गया। इससे दक्षिण हरियाणा की स्थिति खराब होती चली गई।
हरियाणा को नदियों से कितना मिलता पानी
हरियाणा को चार नदियां सतलुज, रावी, व्यास, यमुना और घग्गर से पानी मिलता है। इन नदियों से मिलने वाले पानी का शेयर तय है मगर कभी भी शेयर के मुताबिक पानी नहीं मिला है। इसका एक बड़ा कारण नदियों में पानी की कमी और पंजाब व दिल्ली के साथ जल विवाद है। समझौते के तहत हरियाणा को इन चारों नदियों से 15,95,200 करोड़ लीटर पानी मिलना चाहिए। लेकिन मिल रहा है 11,68,800 करोड़ लीटर पानी।
नदियां शेयर इतना मिलता है
सतलुज 542700 470000
रावी-ब्यास 431700 213000
यमुना 573000 438000
घग्घर 47800 47800
कुल 1595200 1168800
(पानी की मात्रा करोड़ लीटर में।)
हरियाणा में पानी की कितनी कमी
हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण के मुताबिक, राज्य में सालाना लगभग 14 लाख करोड़ लीटर पानी की कमी है। सभी क्षेत्रों में पानी की कुल मांग लगभग 34 लाख करोड़ लीटर है। राज्य में जल की कुल उपलब्धता लगभग 20 लाख करोड़ लीटर है। इसमें सतही जल, भूजल और उपचारित अपशिष्ट जल शामिल है।
सरकार के अब तक इंतजाम
1. दक्षिण हरियाणा में सूख चुकी नदियां कृष्णावती व दोहान को रिचार्ज करके पुनर्जीवित किया गया है। इससे महेंद्रगढ़ और उसके आसपास के इलाकों का जलस्तर बढ़ा है।
2. दक्षिण हरियाणा की नहरों की क्षमता बढ़ाकर टेल तक पानी पहुंचाने की कवायद की जा रही है।
3. डार्क जोन में शामिल क्षेत्रों में धान की खेती छोड़ने वाले किसानों को 7 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
4. दक्षिण हरियाणा में पानी की कमी वाले क्षेत्रों में सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाएं लागू की जा रही हैं।
5. दूषित पानी की समस्या हल करने के लिए सरकार ने 14 सदस्यीय एक कमेटी बनाई हुई है। यह कमेटी स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।
पानी संकट की वजह से दे दिया था इस्तीफा
रेवाड़ी के पूर्व विधायक रघु यादव ने दक्षिण हरियाणा में पानी की समस्या का समाधान नहीं होने पर 1989 में विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके प्रयास से ही रेवाड़ी में नहरों से घरों में पेयजल और जरूरतमंदों को पानी पहुंचा था। रघु यादव का कहना है कि इसका हल यही है कि नदियों से मिलने वाले पानी का समुचित वितरण किया जाए। जहां ज्यादा जरूरत है वहां पानी ज्यादा मिलना चाहिए।
विशेषज्ञ की राय
दक्षिण हरियाणा के फरीदाबाद, पलवल गुड़गांव व मेवात मैं पानी की कमी के साथ दूसरी पानी की बहुत बड़ी समस्या है। इन जिलों में ओखला से पानी मिलता है, लेकिन वह पानी बहुत प्रदूषित है। इससे लोग कैंसर के शिकार हो रहे हैं। पलवल के कुछ गांव में कैंसर के केस बढ़ रहे हैं। वहीं, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ में भूमिगत पानी की समस्या है लेकिन वहां कुछ सालों में सूखी नदियों को पुनर्जीवित करने का काम चल रहा है। इससे कुछ इलाकों का जलस्तर बढ़ा है। इन इलाकों में दूषित पानी की समस्या नहीं है। सरकार को इन इलाकों में पानी के स्टोरेज का सिस्टम बनाना चाहिए। इससे यहां पानी की समस्या हल हो सकती है। इसमें बड़े किसानों को भी आगे आना होगा और उन्हें वाटर रिचार्जिंग की ओर ध्यान देना होगा। - डॉ शिव सिंह रावत, पूर्व अधीक्षण अभियंता, हरियाणा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग व आईआईटी से पीएचडी
राजनेताओं के वादे व दावे
सरकार राजस्थान को पानी देने का करार रद्द करें : किरण चौधरी
भाजपा सरकार ने दक्षिण हरियाणा के जिलों में पानी की समस्या दूर करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। बल्कि हरियाणा के पानी को राजस्थान भेजा जा रहा है। राजस्थान सरकार की वजह से ही दक्षिण हरियाणा में पानी का संकट पैदा हुआ है। सरकार से मांग है कि यमुना के पानी को लेकर हुए करार को सरकार रद्द करे और यमुना के पानी को दक्षिण हरियाणा में पहुंचाया जाए।
- किरण चौधरी, तोशाम से कांग्रेस विधायक व पूर्व नेता प्रतिपक्ष
सभी नहरों का सुधारीकरण मनोहर सरकार ने किया
दक्षिण हरियाणा में पानी की समस्या को हल करने के लिए मनोहर सरकार ने सबसे ज्यादा कार्य किए हैं। इन इलाकों की सभी नहरों का सुधारीकरण मनोहर सरकार ने किया है। जो नदियां सूख चुकी थी, जिनकी पूर्व सरकारों ने कोई सुध नहीं ली, उन्हें हमारी सरकार ने पुनर्जीवित का काम किया है। कई और नए प्रोजेक्ट भी चल रहे हैं, जिनका असर एक-दो सालों में दिखने लगेगा।
- जवाहर यादव, मुख्य प्रवक्ता, भाजपा व हरियाणा के मुख्यमंत्री के पूर्व ओएसडी।