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बेटे ने किया किनारा तो बेटी ने पकड़ा मां का हाथ, कहानी सुन छलक पड़ेंगे आपके आंसू

Sun, 02 Apr 2017 09:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला
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बेटे ने मां को वृद्धाश्रम छोड़ा
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कलयुग में रिश्ते कितने झूठे और कितने कम पड़ते जा रहे हैं, ये आज आपको इस घटना से मालूम हो जाएगा। मामला हरियाणा के अंबाला का है, जिसकी कहानी सुन कर आपके भी आंसू छलक सकते हैं। जिन बेटियों को लोग पराया धन कहते हैं वो जिन्दगी में कहां आकर साथ देगी ये इस बूढ़ी मां ने नहीं सोचा था। जिस बेटे को उम्मीद की आंखों से देखा वही बेटा बूढ़ी मां को वृद्धाश्रम छोड़ गया। पिता की वृद्धाश्रम में मौत हो गई, इसके बाद भी बेटा नहीं आया। 
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इस घटना ने लोगों को बेटा और बेटी के फर्क करने की सोच पर प्रश्न खड़ा कर दिया है। अंबाला कैंट स्थित पुरानी ट्रिब्यून कालोनी निवासी 79 वर्षीय ऊषा सच्चर और उनके पति सतीश सच्चर को पांच साल पहले बेटे रजत ने अपनी शादी के बाद घर से निकाल दिया। इसके बाद से वह दोनों कुरुक्षेत्र के प्रेरणा वृद्धाश्रम में रह रहे थे।उस समय पंजाब के लुधियाना जिले में ब्याही बेटी मोनिका लेखी उनको अपने घर ले जाना चाहती थी, लेकिन उन दोनों को बेटी के ससुराल में रहना गवारा न था। 
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बेटे के व्‍यवहार से अाहत पति-पत्‍नी वृद्धाश्रम में रहे

बेटे ने मां को वृद्धाश्रम छोड़ा
बेटे के व्‍यवहार से अाहत पति-पत्‍नी वृद्धाश्रम में रहे थे। इसके बाद पिछले साल 22 अप्रैल को सतीश सच्चर का स्वर्गवास हो गया। उस समय भी बेटा नहीं आया और न ही उसने मांं का हाल जानना उचित समझा।  बताया जाता है कि वृद्धाश्रम के संचालक ने पिता की अपने साथ चलने को कहा, लेकिन संतान से मिली चोट और लोक लाज के कारण वह  बेटी के घर जाने को तैयार नहीं हुईं। मोनिका लगातार मां को अपने साथ ले जाने की जिद करने लगी।

ऊषा सच्चर हर कष्‍ट सहने को तैयार थीं, लेकिन यह सोच कर कि बेटी के घर जाने पर लोग क्‍या कहेंगे वह उसके साथ जाने को तैयार न‍हीं हुईं। लेकिन, बेटी ने हार नहीं मानी और उसकी जिद के सामने मां झुकना पड़ा और वह उसके साथ जाने को तैयार हो गई। 
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पति ने दिया साथ तो मां आई घर

बेटे ने मां को वृद्धाश्रम छोड़ा
पेशे से शिक्षिका मोनिका के पति का अपना व्यवसाय है। 40 वर्षीय मोनिका बताती हैं कि उनके इस निर्णय में उनके पति ने भी पूरा साथ दिया। मोनिका लेखी जब अपनी मां को लेने आई तो वहां रह रहे वृद्धों की आंखें नम हो गईं। आश्रम संचालक जयभगवान सिंगला और प्रधान रेणु खुब्बर ने ऊषा सच्चर को फूल देकर विदा किया। ये घटना सबके सामने रिश्तों की उलझी पहेली में एक मिसाल है। 
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