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स्मार्ट पार्किंग अब दूर नहीं : दीवाली के बाद टेंडर, छह महीने में लागू हो जाएगी परियोजना

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चंडीगढ़। शहर में स्मार्ट पार्किंग अब दूर नहीं है। नगर निगम ने प्री-आरएफपी बैठक के बाद फैसला लिया है कि दिवाली के बाद स्मार्ट पार्किंग के लिए टेंडर जारी कर दिया जाएगा। निगम का दावा है कि टेंडर पूरा होने के बाद छह महीने में परियोजना को पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा।
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नगर निगम शहर के 89 पार्किंग को स्मार्ट बनाने की परियोजना पर काम कर रहा है। स्मार्ट पार्किंग पॉलिसी के तहत पार्किंग के प्रवेश और निकास पर ऑटोमैटिक बूम बैरियर लगाए जाएंगे। करीब 89 पार्किंग स्थलों पर फास्ट टैग को स्कैन कर यह बूम बैरियर अपने आप खुल जाएंगे। निकासी के समय जितने समय गाड़ी पार्किंग में खड़ी हुई होगी, उसके हिसाब से फास्ट टैग से पैसे कट जाएंगे। निगम ने ऑनलाइन ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए कैश देने वालों पर अतिरिक्त पांच रुपये का शुल्क भी लगाया है। नवंबर के मध्य में टेंडर जारी करने के बाद एक प्री-बिड बैठक होगी। कंपनियां बोली लगाएंगी। उसके बाद तकनीकी और वित्तीय बोली खोली जाएगी। पार्किंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करना और उसे चलाने की जिम्मेदारी कंपनी की होगी। जो राजस्व आएगा और उसमें से निगम को जो भी कंपनी ज्यादा हिस्सा देने के लिए बोली लगाएगी, उसे टेंडर आवंटित किया जाएगा।

प्री-आरएफपी बैठक में 12 कंपनियों ने लिया हिस्सा
यह परियोजना अगले करीब 15 वर्षों के लिए होगी, इसलिए आरएफपी जारी करने से पहले इच्छुक कंपनियों से चर्चा की गई। आम तौर पर टेंडर के बाद प्री-बिड में कंपनियों के साथ बैठक होती हैं। इसमें जो सुझाव-आपत्तियां मिलती हैं, उनके लिए कॉरिजेंडम जारी करने पड़ते हैं। निगम को ऐसा न करना पड़े, इसलिए पहले ही कंपनियों के साथ संवाद किया और उनके सुझावों को आरएफपी में शामिल करने के बाद ही टेंडर जारी किया जाएगा। नगर निगम की आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने बताया कि बैठक में बैंक के अलावा ऐसी कई कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए जो एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, मॉल और दूसरे शहरों में पार्किंग का काम कर रही हैं। ऑनलाइन और ऑफलाइन कुल करीब 12 कंपनियों ने हिस्सा लिया। काफी अच्छी चर्चा हुई है। उम्मीद है कि टेंडर में कई कंपनियां हिस्सा लेंगी।
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पिछली गलतियों से सबक, ज्वाइंट खाते में आएंगे पैसे
पार्किंग घोटाले से सीख लेते हुए निगम ने कई शर्तों में बदलाव किए हैं। सबसे अहम यह है कि डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ाया दिया जाएगा। पार्किंगों से जो रोजाना पैसों का कलेक्शन होगा, वो ज्वाइंट खाते में जाएंगे। कोई भी एक कंपनी, पैसों को दूसरे खाते में ट्रांसफर नहीं कर सकेगा। कैश को रोजाना जमा कराना होगा। अब तक जितने भी पार्किंग के ठेके दिए गए हैं, उसमें रोजाना के पैसों का कलेक्शन कंपनी करती थी और महीने में निगम को फीस देती थी। बैठक में कंपनियों ने बताया कि 15 वर्षों में मशीनों को कम से कम दो बार और ज्यादा से ज्यादा तीन बार बदलने की जरूरत पड़ेगी। इस पर भी चर्चा हुई कि अगर कर्मचारियों ने हड़ताल कर दिया या कोरोना जैसी महामारी फिर आ जाती है तो ऐसे में जो नुकसान होगा, वह कौन झेलेगा। अब निगम इन सभी मुद्दों को शामिल करके टेंडर जारी करेगा।
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