चंडीगढ़। स्मार्ट सिटी की योजनाओं को विस्तार देने से पहले अब निगम के साथ समझौता करना जरूरी होगा। शहरी एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से पूछा गया है कि जब स्मार्ट सिटी की जगह नहीं है तो परियोजनाओं पर इतना खर्चा क्यों किया जा रहा है। अब स्मार्ट सिटी के अधिकारियों ने तय किया है कि जितने काम शुरू हो गए हैं, उनका निगम के साथ समझौता कर लिया जाए।
निगम आयुक्त केके यादव ने बताया कि स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के अंतर्गत 18 कार्य शुरू हो गए हैं। केंद्र ने पूछा है कि स्मार्ट सिटी की अपनी भूमि
नहीं है तो फिर क्यों वहां इतना रुपया लगाया जा रहा है। अब भूमि के लिए स्मार्ट सिटी से समझौता करेंगे। इसके लिए जितने सालों की योजना होगी, उतने सालों का समझौता किया जाएगा। इससे दस्तावेजों में स्पष्ट रहेगा कि निगम और स्मार्ट सिटी के आपसी सामंजस्य से योजना चलाई जा रही है। वहीं भविष्य में कोई योजना शुरू करेंगे तो उसमें समझौता करने के बाद ही आगे कोई कार्य करेंगे। इसके लिए सदन ने भी सहमति दे दी है।