मनीमाजरा का 24 घंटे पानी सप्लाई का केंद्र
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केंद्र सरकार से फंड न मिलने के बाद चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) को 20 मार्च को बंद करने का फैसला लिया गया है। सीएससीएल में काम करने वाले सभी कर्मचारियों को 31 मार्च तक नौकरी से निकालने का नोटिस भी दे दिया गया है। सभी प्रोजेक्ट्स को निगम और प्रशासन को सौंपने का पूरा खाका तैयार हो चुका है। इस फैसले के साथ ही चंडीगढ़ पहला शहर बन गया है जहां का स्मार्ट सिटी लिमिटेड बंद होने जा रहा है।
मुख्य सचिव राजीव वर्मा की अध्यक्षता में बुधवार को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक हुई। इसमें सीएससीएल के विभिन्न परियोजनाओं, उनकी स्थिति, लंबित परियोजनाएं और सीएससीएल के बंद होने के बाद उन्हें किन-किन विभागों को सौंपा जाएगा, इस पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में अधिकारियों को बताया गया कि कुल 36 परियोजनाओं पर कुल 853 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं और 53 करोड़ रुपये परिचालन व्यय के रूप में अभी भी उनके पास लंबित हैं। 853 करोड़ में से लगभग 304 करोड़ रुपये सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट परियोजना की स्थापना पर खर्च किए गए। 334 करोड़ रुपये से आईसीसीसी व स्काडा, 20 करोड़ रुपये से पब्लिक बाइक शेयरिंग, स्कूलों को स्मार्ट बनाने पर करीब 9 करोड़, 24 घंटे पानी की परियोजना पर करीब 166 करोड़ और बाकी राशि कई सहायक परियोजनाओं पर खर्च की गई।
दो करोड़ का एक प्रोजेक्ट लंबित, 28 फरवरी से पहले पूरा करने के निर्देश
स्मार्ट सिटी की तरफ से रायपुर कलां में करीब दो करोड़ की लागत से मरे जानवरों को जलाने के लिए एक प्लांट लगाया जाना था, वह अब तक अधूरा है। बैठक में मुख्य सचिव ने आदेश दिया है कि 28 फरवरी तक इस प्रोजेक्ट को पूरा किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह सीएससीएल को बंद करने के लिए 20 मार्च से पहले फाइनल रिपोर्ट तैयार करें। हालांकि इससे पहले अगर स्मार्ट सिटी लिमिटेड को केंद्र सरकार की तरफ से आगे बढ़ाने के लिए कोई पत्र या वित्तीय सहायता आती है तो उस पर आगे काम किया जाएगा।
कर्मियों को 31 मार्च का दिया अल्टीमेटम, मेयर के पास पहुंचे
सीएससीएल ने अलग-अलग प्रोजेक्ट पर काम करने वाले करीब 90 कर्मचारियों को 31 मार्च को नौकरी से निकालने का अल्टीमेटम दे दिया है। 24 घंटे पानी की परियोजना पर करीब 44 कर्मचारी कार्यरत हैं, वो अपनी नौकरी को बचाने के लिए बुधवार को मेयर हरप्रीत कौर बबला से मिले। उन्होंने मांग रखी कि उन्हें बेरोजगार न किया जाए और निगम के किसी विंग में एडजस्ट किया जाए। मेयर बबला ने कहा कि इस संबंध में आयुक्त से बात की है। वीरवार को विस्तार से चर्चा की जाएगी।
नगर निगम पर पड़ेगा 100 करोड़ का बोझ
अधिकतर प्रोजेक्ट नगर निगम को मिलने से उनकी देखरेख और प्रबंधन बड़ी चुनौती होगी। निगम वित्तीय संकट से जूझ रहा है। ऐसे में 2027 तक कई प्रोजेक्ट्स के ऑपरेशन और मेंटेनेंस के लिए स्मार्ट सिटी के पास करीब 53 करोड़ रुपये बचे हैं, लेकिन उसके बाद सीधे निगम पर 100 करोड़ का बोझ पड़ जाएगा। आयुक्त अमित कुमार ने यह बात सदन की बैठक में भी कही है।