बेशक चंडीगढ़ को स्मार्ट सिटी बनाने की बातें हो रही हैं, लेकिन यहां के स्कूलों की हालत तो कुछ और ही हकीकत बयां कर रही है। शहर के गांवों और कॉलोनियों के स्कूलों में इंस्फ्रास्ट्रक्चर की कमी का सामना स्टूडेंट्स कर रहे हैं। अमर उजाला टीम की ओर से गवर्नमेंट हाईस्कूल हल्लोमाजरा की ग्राउंड रिपोर्ट जांची गई। इसमें यह बात सामने आई। हल्लोमाजरा हाईस्कूल तीन जगह पर चलाया जाता है। हल्लोमाजरा के बाहर इस स्कूल में छत पर टीन पड़ी है।
इस गर्मी में बच्चे इसके नीचे बैठकर पढ़ते हैं। इस तरह के हालात में स्टूडेंट्स को कैसे बेहतरीन एजुकेशन मिल सकती है। वहीं स्कूल परिसर में गंदगी का आलम बना हुआ है। वहीं इस जगह पर लगाए गए वाटर कूलर भी खराब पडे़ हैं। इन वाटर कूलर में गर्मी में स्टूडेंट्स को ठंडा पानी नहीं मिलता है। वही एक डिस्पेंसरी के अंदर बिल्डिंग हैं। यहां पर स्टूडेंट्स को वाटर कूलर्स भी नहीं मिल रहा है। वहीं हल्लोमाजरा के अंदर बने स्कूल में कोई प्ले ग्राउंड नहीं है। इस स्कूल में तीन हजार स्टूडेंट्स पढ़ रहे हैं।
यहां पर अगर कोई इमरजेंसी हालात बन जाए तो केवल एक ही रास्ता सीढ़ी का है। इसमें से तीन हजार बच्चों का आना जाना है। अगर यह बिल्डिंग रिस्क जोन में आती है। डिपार्टमेंट को यह जानकारी है लेकिन इसके बाद भी इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस तरह के हालात में परेशानी हो सकती है। स्कूल में पढ़ने वाले छठवीं क्लास के स्टूडेंटस संदीप कुमार ने बताया कि स्कूल का वाटर कूलर खराब पड़ा है। वहीं टॉयलेट में भी गंदगी है। यह भी टूटा हुआ है। इसे अभी तक ठीक नहीं कराया गया है। इस कारण परेशानी होती है।