चंडीगढ़। जिला अदालत ने जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) के आदेश का उल्लंघन करने और विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर पथराव कर हमला करने के आठ साल पुराने मामले में 15 लोगों को छह माह कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने सजा पर फैसला सुनाते हुए कहा, आरोपियों ने दिन के उजाले में पुलिसकर्मियों पर हमला किया। इस मामले में घटना अहंकार की भावना और आत्म-अनुशासन की पूरी कमी को दर्शाती है।’ दर्ज मामले के तहत साल 2015 में हुई इस घटना में अदालत ने जिन लोगों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है, उनमें कमलजीत सिंह, अफजल खान, सरोज पवन, हसमीत सिंह, हिरेंद्र सिंह, मोहम्मद जाकिर, अर्चना, बीना, कांति, फ्लोरेंसिया, रुमान, नवकिरण, फिरदोश, ज्योति और ईशा अरोड़ा शामिल हैं। मामले में सेक्टर-17 थाना पुलिस ने सब इंस्पेक्टर जसविंदर कौर के बयान के आधार पर केस दर्ज किया था।
मामले में चली अदालत की कार्रवाई के दौरान आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए, लेकिन उन्होंने खुद को निर्दोष बताया। अभियुक्तों के वकील ने तर्क दिया कि उन्हें मामले में झूठा फंसाया गया था, सरकारी वकील ने दावा किया कि अभियोजन पक्ष ने बिना किसी संदेह के मामले को साबित कर दिया है। मामले में सामने आए तथ्यों और दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपियों को आईपीसी की धारा 147, 148, 188, 323, 332, 353 और आईपीसी (1860) की धारा 149 के तहत दोषी ठहराते हुए छह महीने कैद की सजा सुनाई है।
क्या था मामला...
दायर मामले के तहत 29 जून 2015 को एसआई जसविंदर और कुछ अन्य पुलिसकर्मियों को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए चंडीगढ़ के सेक्टर 17 में तैनात किया गया था। इस दौरान आरोपियों के नेतृत्व में कई लोग सेक्टर-17 स्थित उपायुक्त कार्यालय के सामने एकत्र होने लगे। जो लोग घटनास्थल पर एकत्र हुए थे, उन्हें पांच या अधिक लोगों की सभा के खिलाफ जिला मजिस्ट्रेट का आदेश दिखाया गया, लेकिन वे फिर भी नहीं माने और यूटी प्रशासन के खिलाफ नारे लगाने लगे। जब उन्हें जाने के लिए कहा गया तो उन्होंने पुलिस पर पथराव करना शुरू कर दिया और उनमें से कुछ पर लाठियों से हमला किया। हमले में कुछ पुलिसकर्मियों को चोटें आई थीं, जिसके बाद सेक्टर-17 थाना पुलिस ने सब इंस्पेक्टर की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था।