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बगीचे में बैठकर मिलता है सुकून, मानसिक तनाव हो जाता है दूर

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सेक्टर 27 के हाउस न. 41 में अपने गार्डन के साथ हरप्रीत कौर - फोटो : CHANDIGARH
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चंडीगढ़। हरियाली के कारण ही सिटी ब्यूटीफुल की पूरे देश में पहचान है। पूरे शहर की हरियाली मुझे अपने घर में महसूस होती है। जो सुकून बागवानी करने में है, वह किसी अन्य काम में नहीं हो सकता। मैंने अपने बगीचे में पौधों के ऊपर सफेद और हरे रंग की लाइटिंग लगाई हुई है। रात में या लाइटिंग बहुत ही प्यारी लगती है। दिन में यह हरे-भरे पौधे दिल खुश करते हैं और रात में लाइटिंग से लोन का नजारा बहुत सुकून देता है। यहां बैठकर सारा मानसिक तनाव दूर हो जाता है। यह कहना है सेक्टर- 27 निवासी हरप्रीत कौर बबला का।
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उन्होंने बताया कि वह पिछले 25 साल से अपने घर में बागवानी कर रही हैं। घर पर पेड़-पौधे होने से शुद्ध हवा मिल जाती है। पौधों के साथ एक अलग ही प्रकार की खुशी का एहसास होता है। उनके घर पर एलजोरा, फाइकस, पाम, बोगनविला समेत कई प्रकार की किस्म के पौधे लगे हुए हैं। घर पर लगभग 200 से ज्यादा गमले हैं। इनमें मेडिसन प्लांट जैसे गिलोय, तुलसी, कड़ी पत्ता, एलोवेरा और पुदीना भी लगे हुए हैं। वह अपने पौधों को सुबह शाम दो दो घंटे देती हैं। कभी-कभी वह माली की भी सहायता ले लेती हैं। उन्होंने कहा कि यदि मौसम सुहावना हो तो रात का खाना भी लॉन में ही बैठ कर खाते हैं। लोन में कुर्सियां मेज लगे हुए हैं जिन पर बैठकर परिवार के सभी सदस्य हरियाली का आनंद लेते हैं।
पिता जी को देखकर मिली प्रेरणा
हरप्रीत कौर ने बताया कि उनके पिता कर्नल मक्खन सिंह अपनी नर्सरी का काम करते थे। उनको पौधों और प्रकृति से बहुत प्यार था। उन्हें कई समारोह में सम्मानित भी किया जाता था। अक्सर उनके साथ नर्सरी जाया करती थी, तभी से बागवानी करने की प्रेरणा मिली। मौसम के हिसाब से उनके घर में गमले होते हैं। सर्दियों में घर में 400 गमले हो जाते हैं। गर्मियों में धूप के कारण पौधे सूख जाते हैं इसलिए गमलों को साफ करके रख लिया जाता है।
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देसी खाद का करती हैं प्रयोग
हरप्रीत कौर ने बताया कि वह पौधों के लिए यूरिया और कंपोस्ट खाद के मिश्रण का प्रयोग करती हैं। इसके साथ ही देसी खाद का भी प्रयोग करती है। इससे पौधों को काफी मजबूती मिलती है। इनसे पौधों को कीड़ा नहीं लगता साथ ही पौधों पर चीटियां भी नहीं आती। देसी खाद पौधों को हर प्रकार से सुरक्षित रखती हैं। इससे बीमारियां लगने का खतरा भी कम रहता है।
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