खामोश मतदाता बनाएंगे-बिगाड़ेंगे समीकरण, नहीं दे रहे थाह
-वोटों के ध्रुवीकरण में जुटे नेता, मतदाता कर रहे सभी से वादा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा चुनाव में जीत के लिए सभी प्रत्याशियों ने जी-जान झोंक रखी है। रैलियों और जनसभाओं के शोर में नेता मतदाताओं को रिझाने में कसर नहीं छोेड़ रहे हैं। वहीं, लोकसभा चुनाव की तर्ज पर विधानसभा चुनाव में भी हरियाणा के मतदाता नेताओं को अपनी थाह नहीं दे रहे हैं। केवल जाट वोटबैंक मुखर हो रहा है और खुलकर अपनी बात रख रहा है। वहीं, गैर जाट मतदाता चुप्पी साधे हैं। चुनाव को लेकर अभी वह कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। ये खामोश मतदाता कई नेताओं के समीकरण बनाएंगे और बिगाड़ेंगे, क्योंकि ये लोग ऐन मौके पर अपना फैसला करेंगे।
हरियाणा में अधिकतर विधानसभा चुनाव में जातिगत समीकरण हावी रहे हैं। इस बार भी धीरे-धीरे जाट और गैर जाट फैक्टर का माहौल बन रहा है। ये इसलिए भी बन रहा है कि भाजपा ने कई जाट बहुल सीटों पर गैर जाट प्रत्याशी उतारे हैं। खामोश मतदाता नेताओं को नाराज भी नहीं कर रहे हैं, जो भी उम्मीदवार उनके दरवाजे या गांव या गली में आ रहे हैं, तो उनसे वोट का वादा भी कर रहे हैं। तमाम कोशिशों के बावूजद खामोश मतदाता चुनाव को लेकर अपने पत्ते नहीं खोल रहा है।
किसान आंदोलन का असर, लेकिन मुखर नहीं
लोकसभा और विधानसभा चुनाव में एक बात समान है कि इस बार भी किसान आंदोलन का असर है, लेकिन लोकसभा चुनाव में जिस प्रकार से किसानों ने भाजपा और जजपा के नेताओं का खुलकर विरोध किया था और उनकों गांवों में नहीं घुसने दिया था, इस बार ऐसा कुछ नहीं है। अंदर खाते किसान वर्ग भाजपा और जजपा ने नाराज जरूर है और भारतीय किसान यूनियन दोनों दलों के विरोध का फैसला भी ले चुकी है।
लोकसभा चुनाव में नहीं चला था जाट-गैर जाट फैक्टर
लोकसभा चुनाव में जाट और गैर जाट फैक्टर नहीं चला था। जाट बहुल सोनीपत संसदीय क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस दोनों के ही प्रत्याशी ब्राह्मण समाज से थे। भाजपा के मोहन लाल बड़ौली को ब्राह्मणों के साथ वैश्य समाज के वोट भी खूब मिले, जबकि कांग्रेस के सतपाल ब्रह्मचारी की जीत में जाट और अनुसूचित जाति के मतदाताओं ने अहम भूमिका निभाई। भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट पर भाजपा ने जाट प्रत्याशी धर्मबीर सिंह और कांग्रेस ने अहीर प्रत्याशी राव दान सिंह को मैदान में उतारा। राव दान सिंह अपने ही हलके महेंद्रगढ़ के साथ ही अटेली, नारनौल और नांगल चौधरी में हार गए, जहां यादव वोट सबसे ज्यादा हैं। वहीं, भिवानी जिले की जाट बहुल सीटों बाढड़ा, लोहारू और चरखी दादरी में धर्मबीर सिंह पिछड़ गए। यादव बहुल विधानसभा क्षेत्रों के सहारे धर्मबीर लोकसभा पहुंचने में सफल रहे। रोहतक से कांग्रेस सांसद बने दीपेंद्र हुड्डा को कोसली और झज्जर में अहीरों ने दिल खोलकर वोट दिए। करनाल से एनसीपी के उम्मीदवार वीरेंद्र मराठा अपने रोड़ समाज के दम पर मैदान में उतरे थे, लेकिन समाज ने उन्हें नकार दिया। रोड़ समाज के पौने दो लाख मतदाता होने के बावजूद मराठा को सिर्फ 30 हजार वोट मिले। कुरुक्षेत्र में सबसे अधिक साढ़े चार लाख जाट मतदाता होने के बावजूद इनेलो के अभय चौटाला तीसरे स्थान पर रहे, जबकि जाट बहुल विधानसभा क्षेत्रों में आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी ड. सुशील गुप्ता और सांसद नवीन जिंदल को लीड मिली।