भारत सरकार द्वारा प्रतिबंध लगाने के बाद सिख फॉर जस्टिस ने सोशल मीडिया को अपना हथियार बना लिया है। यू-ट्यूब पर जहां संस्था के लीगल एडवाइजर गुरपतवंत सिंह पन्नू के वीडियो लगातार अपलोड हो रहे हैं वहीं वाट्सऐप पर 500 ग्रुप सक्रिय हैं।
ट्विटर ने सिख फॉर जस्टिस का ऑफिशियल अकाउंट बंद कर दिया है, लेकिन केंद्रीय एजेंसियों की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक यू-ट्यूब के अलावा गूगल से संपर्क कर संस्था पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहा जा रहा है।
कनाडा, अमेरिका और यूके अलावा यूरोप के तमाम देशों में सिख फॉर जस्टिस के रेफरेंडम 2020 पर प्रतिबंध लगाने की सोशल मीडिया पर लगातार निंदा की जा रही है।
ग्रुप गुरपतवंत सिंह उर्फ पन्नू, मन सिंह खालसा और परमजीत सिंह पम्मा के जरिये बनाए गए हैं, जिन पर भारत की गुप्तचर एजेंसियां लगातार नजर रख रही हैं। केंद्रीय एजेंसियों के मुताबिक करीब छह न्यूज वेबसाइट के पेज बनाकर भी सिख फॉर जस्टिस ने अपना अभियान तेज कर दिया है।
सिख फॉर जस्टिस के यू-ट्यूब चैनल पर भी वीडियो अपलोड किए हैं, जिसमें पन्नू ने भारत सरकार को खुली चुनौती देकर कहा है कि रेफरेंडम 2020 हर हाल में अगले साल नवंबर में करवाया जाएगा।
इस वीडियो के लिंक को सभी वाट्सऐप ग्रुप में फैलाया जा रहा है। संस्था से जुड़े देश में 12 मामले दर्ज हैं, जिसमें 39 लोगों को अब तक गिरफ्तार किया गया है। इन मामलों में पंजाब पुलिस 10 मामले जांच कर रही है, वहीं उत्तराखंड पुलिस और एनआईए एक-एक मामले की जांच कर रहे हैं।
इनमें ज्यादातर मामले रेफरेंडम 2020 के पोस्टर लगाना और लोगों को भड़काने के हैं। कुछ मामले ऐसे भी हैं, जिनमें लोगों को हिंसा भड़काने और उसके लिए हथियार मुहैया कराने का वादा करना भी शामिल है।
24 घंटे पहले केंद्रीय खुफिया एजेंसी ने केंद्र सरकार को एक रिपोर्ट भेजी है, जिसमें कहा है कि एसफजे सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय है। ट्विटर पर इनके दो अकाउंट्स को सस्पेंड कर दिया गया है।
लेकिन फिर भी यह संगठन नए-नए अकाउंट बनाकर सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपने प्रोपेगंडा के लिए कर रहा है। एसएफजे के 2 लाख से ज्यादा फॉलोअर हैं। केंद्रीय एजेंसियों ने सरकार को आगाह किया है कि संस्था के सोशल मीडिया अभियान पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाएं जाएं।