मोहाली। फेज-1 में स्थित प्राचीन श्री शिव मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के सातवें दिन आचार्य डॉ. मुकेश भारद्वाज ने भरत-मिलाप का प्रसंग सुनाया। आचार्य ने कहा कि जब भगवान श्रीराम लंकापति रावण का वध करने के बाद पुष्पक विमान से जैसे ही अयोध्या में उतरे तो सामने भरत और गुरु वशिष्ठ सहित मुनियों को अपनी तरफ आते देखा तो उन्होंने धनुष-बाण पृथ्वी रखकर गुरु की चरण वंदन की। गुरु वशिष्ठ ने भी दोनों भाइयों को उठाकर हृदय से लगा लिया। आचार्य ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी मानस में लिखते हैं कि जिन रघुकुल के स्वामी श्रीराम जी को देवता, मुनि, शंकर और ब्रह्मा आदि नमस्कार करते हैं। भरत जी उनके पैरों पर लेट गए और उठाने के बाद भी नहीं उठे। श्री राम ने उन्हें जबरन उठाकर हृदय से लगाया तो सांवले रंग के श्रीराम का रोम-रोम पुलकित हो खड़ा हो गया। प्रभु श्रीराम को देखकर सभी अयोध्यावासी बहुत ही हर्षित हुए और उनके सारे शोक मिट गए।