हरियाणा की शूटर गौरी और विश्वजीत श्योराण को 2016-17 में मिले भीम अवार्ड की अर्जी ही खेल विभाग के दस्तावेजों से गायब है, जबकि दोनों पर गंभीर आरोप लगे हुए हैं। विभाग की भीम अवार्ड की फाइलों में अवार्ड देने के लिए आधार बनाई गई स्कोरिंग सीट तो है, मगर अवार्ड पाने के लिए दी गई अर्जी है ही नहीं। इससे भीम अवार्ड के चयन की प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में आ गई है।
भीम अवार्ड सहित अन्य प्रतियोगिताओं में गलत तरीके से ईनामी राशि पाने के आरोपों में गौरी और विश्वजीत को पहले ही खेल विभाग की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी हो चुका है। गौरी के अलावा उनके भाई विश्वजीत श्योराण पर भी तय से अधिक राशि हासिल करने का आरोप लगा है। उनके साथ ही खेल विभाग के तत्कालीन निदेशक और दोनों के पिता जगदीप सिंह को भी नोटिस जारी किया गया है।
खेल विभाग के अनुसार, जगदीप सिंह पर पद का दुरुपयोग करके गौरी और विश्वजीत को वित्तीय लाभ पहुंचाने के आरोप हैं। खेल विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव अशोक खेमका की ओर से 11 मार्च 2019 को मेमो नंबर 1/12/2018-1 एसवाईए के तहत तीनों को नोटिस भेजे गए हैं। 15 दिन के भीतर इन्हें नोटिस का जवाब देना है।
खेल विभाग ने पूरे मामले को सरकारी राशि का दुरुपयोग माना है। गौरी और विश्वजीत की भीम अवार्ड की अर्जी गुम होने से खेल विभाग की ओर से भीम अवार्ड के लिए गठित चयन समितियों पर भी सवालिया निशान लग गया है। सवाल उठ रहा है कि दोनों शूटर ने अगर अर्जी दी थी तो वे विभाग के रिकॉर्ड से गायब कैसे हुईं।
राशि न लौटाने की स्थिति में ये हो सकती है कार्रवाई
कारण बताओ नोटिस के अनुसार, गौरी और विश्वजीत को हासिल की गई 60 लाख रुपये से अधिक की राशि 12 प्रतिशत ब्याज सहित लौटानी होगी। भीम अवार्ड के तहत मिला प्रमाण पत्र, भीम स्टे्च्यू, ब्लेजर, टाई और स्कार्फ भी वापस करना होगा। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो भविष्य में कैश अवार्ड के लिए प्रतिबंधित करने के अलावा उत्कृष्ट खिलाड़ियों के खेल कोटे से मिलने वाली सरकारी नौकरियों से भी वंचित किया जा सकता है। राशि न देने की स्थिति में विभाग कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगा।
गौरी पर 13 और विश्वजीत पर 8 अवार्ड गलत तरीके से लेने के आरोप
खेल विभाग के कारण बताओ नोटिस के अनुसार, गौरी श्योराण ने 13 और विश्वजीत ने 8 अवार्ड पात्र न होने के बावजूद हासिल किए हैं। गौरी पर 43 लाख और विश्वजीत पर 17 लाख रुपये की राशि ऐसी प्रतियोगिताओं के लिए हासिल करने का आरोप है, जिनके लिए वह पात्र नहीं थे।
निर्धारित अवधि से पहले दे देंगे नोटिस का जवाब
आईएएस जगदीप सिंह का कहना है कि नोटिस का जवाब देने में अभी समय है। तय अवधि के भीतर जवाब दे दिया जाएगा। भीम अवार्ड की चयन समिति से उन्होंने खुद को अलग कर लिया था। पांच अलग-अलग कमेटियां होती हैं। उनके दस्तावेज जांचने के बाद भीम अवार्ड दिया जाता है। गौरी और विश्वजीत ने अवार्ड के लिए जिला खेल अधिकारी के समक्ष आवेदन किया था।
उनके दस्तावेज जांचने के बाद डीसी व मुख्यालय स्तर की कमेटी भी दस्तावेजों की जांच करती है। इसके बाद ही भीम अवार्ड मिलता है। वह किसी समिति में नहीं थे, न ही उनकी वित्तीय शक्तियां एक लाख से ऊपर हैं। फिर धांधली का सवाल ही कहां उठता है। उनके पास सारे दस्तावेज हैं। जूनियर श्रेणी में 1993 से अवार्ड दिया जा रहा है। सैकड़ों खिलाड़ियों को सरकार की स्वीकृति के बाद अवार्ड मिले हैं।
खेमका बदल चुके अब सरकार के पाले में गेंद
आईएएस अशोक खेमका का खेल विभाग से तबादला हो चुका है। उनकी जगह आनंद मोहन शरण खेल विभाग के प्रधान सचिव बनाए गए हैं। नोटिस तो खेमका के समय ही जारी हुआ, लेकिन आगामी कार्रवाई अब नए प्रधान सचिव पर निर्भर करती है। पूरे मामले में अब गेंद सरकार के पाले में है।