-1500 संभावित घर खरीदारों के 363 करोड़ रुपये के दुरुपयोग का है आरोप
-धन शोधन अधिनियम में ईडी ने सिकंदर को किया था गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रियल एस्टेट कंपनी के मालिक सिकंदर सिंह छौक्कर को झटका देते हुए ईडी की गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि याची के मामले में अपराध की बड़ी रकम की पहचान की गई है और प्रथम दृष्टया मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध बनता है।
जस्टिस महाबीर सिंह सिंधु ने फैसले में कहा कि लगभग 1500 संभावित घर खरीदारों ने अपनी कमाई इस उम्मीद में निवेश की है कि उन्हें आश्रय मिलेगा। याचिकाकर्ता ने अन्य सह-आरोपियों के साथ साजिश करके 363 करोड़ रुपये (लगभग) की राशि का दुरुपयोग किया है और उसे लूटा है। इसलिए याचिका को खारिज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। आरोप के अनुसार सिकंदर सिंह पर मेसर्स माहिरा होम्स प्राइवेट लिमिटेड के एक प्रमुख शेयरधारक हैं, जो गुरुग्राम में निर्माण परियोजनाओं से निपटने वाली मेसर्स साईं आइना फार्म्स प्राइवेट लिमिटेड (एसएएफपीएल) सहित कई अन्य सहयोगी कंपनियों की होल्डिंग कंपनी है। वर्ष 2017 में हरियाणा के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के निदेशक ने गुरुग्राम में एसएएफपीएल के पक्ष में 1500 फ्लैटों के निर्माण के लिए लाइसेंस दिया था। कंपनी ने दो बैंक गारंटी प्रस्तुत की और 2018 में रियल एस्टेट से अपेक्षित लाइसेंस प्राप्त किया। इस आधार पर, एसएएफपीएल ने 1,500 संभावित घर खरीदारों से 363 करोड़ रुपये की बुकिंग राशि एकत्र की। नीरज चौधरी नामक व्यक्ति ने मेसर्स डीएस एस्टेट्स एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड (निर्माण में शामिल याचिकाकर्ता की कंपनियों में से एक) का अतिरिक्त निदेशक होने का दावा करते हुए, एसएएफपीएल, वर्तमान याचिकाकर्ता और अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए मजिस्ट्रेट कोर्ट के समक्ष दो अलग-अलग शिकायतें दर्ज कीं। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि एसएएफपीएल ने लाइसेंस प्राप्त करते समय डीटीसीपी के पक्ष में फर्जी बैंक गारंटी प्रस्तुत की। ईडी ने पाया कि उपरोक्त अपराधों में से कुछ धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत अपराध हैं और इस प्रकार ईसीआईआर दर्ज किया गया। रिकार्ड पर मौजूद सामग्री की जांच करने के बाद हाईकोर्ट ने सिंह की दलीलों को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि बार-बार समन के बावजूद याची ईडी के समक्ष पेश नहीं हुआ।