डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम
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शहर में शनिवार को शिरोमणि अकाली दल (शिअद) कोर कमेटी की बैठक में जहां पार्टी के सभी नेताओं ने विधानसभा चुनाव में डेरा सच्चा सौदा से मिले समर्थन की जमकर प्रशंसा की और उसे पार्टी के हित में करार दिया, वहीं शिअद के लिए यही मुद्दा आने वाले दिनों में बड़ा सिरदर्द बनने की आशंका भी बढ़ती जा रही है।
डेरे की मदद से वोट हासिल करने की इस मुहिम की जांच कर रही शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की तीन सदस्यीय कमेटी जहां शिअद नेताओं से पूछताछ की तैयारी कर रही है, वहीं कमेटी ने अब अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए तय किया है कि 17 मई, 2007 के हुक्मनामे के बाद अब तक कितनी बार अकाली नेताओं ने डेरा सच्चा सौदा की मदद ली है।
साथ ही, इस अवधि के दौरान कितने अकाली नेता सिरसा में डेरा प्रमुख से मुलाकात करने गए थे। दरअसल, वर्ष 2012 में भी पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान डेरा सच्चा सौदा ने शिअद को समर्थन दिया था। एसजीपीसी की कमेटी अब पूरे मामले की जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट श्री अकाल तख्त के जत्थेदार को सौंपेगी।
पंथ से बाहर किए जा सकते हैं शिअद के सभी दोषी नेता
एसजीपीसी प्रधान प्रो. किरपाल सिंह बडूंगर
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माना यह जा रहा है कि अगर कमेटी की रिपोर्ट में शिअद के शीर्ष नेता दोषी पाए गए तो श्री अकाल तख्त के जत्थेदार इन नेताओं को पंथ से निकालने का हुक्म सुना सकते हैं। ऐसे हालात में शिअद नरम और गरम ख्याली नेताओं के धड़ों में बंटकर रह जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, एसजीपीसी की कमेटी फिलहाल जांच में बहुत तेजी नहीं दिखा रही बल्कि उसे 11 मार्च को विधानसभा चुनाव नतीजों का इंतजार है। यदि शिअद विधानसभा चुनाव नतीजों में पिछड़ी तो एसजीपीसी सीधे तौर पर शिअद के नेताओं पर दबाव बनाते हुए डेरा मामले में कार्रवाई करेगी।
दूसरी ओर, यह भी माना जा रहा है कि शिअद में गरम ख्याली नेता भी पार्टी की चुनावी हार के बाद डेरा सच्चा सौदा का समर्थन लिए जाने के खिलाफ पार्टी के शीर्ष नेताओं को घेरने की रणनीति बनाएंगे। ऐसी स्थिति, शिअद के संरक्षक प्रकाश सिंह बादल और प्रधान सुखबीर सिंह बादल के लिए पार्टी के भीतर ही कठिनाइयां पैदा करेगी।