चंडीगढ़। कोरोना महामारी के इस दौर में एक तरफ स्वास्थ्य विभाग लोगों को साबुन से हाथ धोने की नसीहत दे रहा है। वहीं, दूसरी तरफ सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था ध्वस्त पड़ी हुई है। आलम यह है कि जीएमएसएच-16 में कई दिनों से साबुन की आपूर्ति ठप है। डॉक्टर और कर्मचारी बिना हाथ धोए मरीजों का इलाज करने को मजबूर हैं। यहां तक की संक्रमण के डर से वे अपने घर से साबुन लेकर ड्यूटी पर आ रहे हैं लेकिन अधिकारियों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। इमरजेंसी, आईसीयू और वार्ड से इस संबंध में बार बार मांग की जा रही है लेकिन इसकी फाइल को लौटा दिया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें यह बात समझ नहीं आ रही कि करोड़ों रुपये का बजट मिलने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के पास साबुन के लिए भी बजट नहीं बचा है। स्थिति यह है कि सितंबर के शुरुआती दौर में सभी जगहों पर साबुन की 4 4 टिकियां दी थीं जो चंद दिनों में ही खत्म हो गईं। अब उसके बाद भेजे जाने वाले डिमांड पर कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। एक कर्मचारी ने बताया कि इस संदर्भ में शिकायत करने पर बार-बार टाल दिया जा रहा है। अधिकारी संक्रमण को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहा है। इससे भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
बॉक्स
आईसीयू से लेकर इमरजेंसी तक में अव्यवस्था
अस्पताल के आईसीयू से लेकर इमरजेंसी व अन्य सामान्य वार्डों तक में साबुन की आपूर्ति ठप है। इससे जहां एक तरफ ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों व डॉक्टरों को परेशानी हो रही है, वहीं उनसे जुड़े मरीजों पर भी संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है लेकिन अधिकारी इसे हल्के में ले रहे हैं। सभी यूनिटों के शौचालयों में साबुन का स्टैंड खाली पड़ा हुआ है या कुछ मरीजों द्वारा घर से लाए गए साबुन से किसी तरह काम चलाया जा रहा है।
कोट-
इस संबंध में मुझे कोई सूचना अब तक नहीं दी गई है। कल ही इसकी जानकारी लेकर किसी भी तरह की समस्या होने पर उसे शीघ्र दूर किया जाएगा।
-डॉ. वीके नागपाल, चिकित्सा अधीक्षक जीएमएसएच-16