चंडीगढ़। शब-ए-बारात 28 मार्च को है। इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग इबादत करते हैं। दुनिया से विदा हो चुके पूर्वजों की कब्र पर जाकर दुआ की जाती है। दो दिनों का रोजा रखा जाता है। यह बात सेक्टर-45 स्थित जामा मस्जिद के इमाम कारी शमशेर अली ने कही।
उन्होंने कहा कि मान्यता है कि इस दिन अल्लाह अपने बंदों के कर्मों का लेखा-जोखा करता है। लोगों को नरक से आजाद भी कर देता है। इसी वजह से मुस्लिम समुदाय रात भर जागकर अल्लाह की इबादत करता है। उन्होंने बताया कि इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार शाबान महीने के 14वीं और 15वीं तारीख को शब-ए-बारात मनाई जाती है। इस बार शब-ए-बारात 28 मार्च को शुरू होगा और 29 मार्च को समाप्त होगा।
उन्होंने बताया कि इस्लामिक मान्यता के अनुसार इस रात को सच्चे दिल से अल्लाह की इबादत करते हुए अपने गुनाहों से तौबा की जाए तो अल्लाह इंसान के हर गुनाह को माफ कर देता है। इस दिन दान पुण्य का विशेष महत्व है। लोग इस दिन अल्लाह से दुआ करते हैं कि अल्लाह मेरी जिंदगी नेक काम में लगाना। यदि मौत हो तो जन्नत मिले।