डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर लगे साधुओं को नपुंसक बनाने के आरोप की जांच में देरी पर हाईकोर्ट ने सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई है। पूछा है कि आखिर अलग-अलग हिस्से में जांच क्यों की जा रही है।
एक साल में जांच पूरी क्यों नहीं हो सकी। हाईकोर्ट ने यहां तक कहा है कि यदि अगली सुनवाई 26 मार्च तक जांच पूरी नहीं हुई तो संबंधित अफसर के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया जा सकता है।
वीरवार को सीबीआई ने जांच की स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर मुकम्मल जांच के लिए और समय का आग्रह किया। इसी पर बेंच ने सख्ती बरती है। डेरा सच्चा सौदा में साधुओं को भगवान से मिलाने के नाम पर नपुंसक बनाए जाने के आरोप लगाती एक याचिका दायर की गई थी। मामले में सरकार को जांच के लिए कहा गया था, लेकिन बाद में यह जांच सीबीआई के हवाले कर दी गई थी। सीबीआई एक साल में ठोस जानकारी जुटाने में नाकाम रही है।
लिहाजा जस्टिस आरके जैन की एकल बेंच ने सीबीआई को दो माह में जांच पूरी करने का निर्देश दिया है और 26 मार्च को जांच की मुकम्मल रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। डेरे के ही साधु हंसराज चौहान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि डेरा सच्चा सौदा में भगवान से मिलवाने के नाम पर साधुओं को नपुंसक बनाया जाता है। चौहान ने अपनी याचिका में कहा था कि उसे भी डेरे की ओर से नपुंसक बनाया गया है।
हाईकोर्ट ने चौहान की मेडिकल जांच पीजीआई से करवाई थी। जांच में पता चला कि वह नपुंसक है। इसके बाद ही सीबीआई को अन्य साधुओं को नपुंसक बनाने के आरोप की जांच का आदेश दिया गया था। चौहान ने याचिका में लगभग 400 साधुओं को नपुंसक बनाए जाने का आरोप लगाया गया था। याचिका के साथ करीब पौने दो सौ साधुओं के नाम तक भी चौहान ने हाईकोर्ट को सौंपे थे। सीबीआई को जांच सौंपने के फैसले के खिलाफ अभी राम रहीम की अपील भी विचाराधीन है। बेंच ने जांच पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया था।